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ऐशबाग में ओ.पी. श्रीवास्तव मेमोरियल स्कूल का वार्षिकोत्सव संपन्न, बच्चों ने दी रंगारंग प्रस्तुति

    ऐशबाग रामलीला मैदान के तुलसी सभागार मे श्री ओ. पी. श्रीवास्तव मेमोरियल स्कूल जो गरीब और मलीन बस्ती के बच्चो के लिए निशुल्क चलाया जाता है के वाषिर्कोत्सव का आयोजन वसुंधरा एन इनिशिएटिव के द्वारा किया गया।  बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रदर्शन हुआ। स्कूल के संचालक श्री दीनानाथ जी 18 वर्षो से स्कूल शिक्षण का कार्य कर रहे हैं। प्रत्येक वर्ष इन बच्चों का मनोबल बढाने के लिए यह आयोजन किया जाता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री संजीत सिंह SrDEE (NR Railway)एवं श्रीअतुल कृष्ण सिंह( dipty secratary LDA)कर्नल मृदुल कुमार सिंह सेना मंडल रहे। मुख्य अतिथि ने अपने वक्तव्य मे कार्यक्रम को प्रेरणादायक और संदेशप्रद बताया एवं प्रधानाचार्या मीना देवी तथा समस्त शिक्षिकाओं की भूरि-भूरि प्रशंसा की।  कार्यक्रम के आयोजनकर्ता वसुंधरा एन इनिशिएटिव की अध्यक्ष नीना सक्सेना, सरिता शुक्ला, उपाध्यक्ष डा अंजना त्रिपाठी, शंकर रोली, रूचि सिंह लखविन्दर कौर,ज्योति सिंह ऋतुजा सिंह बघेल,विभा तिवारी, वंदना श्रीवास्तव मधुलिका श्रीवास्तव का संपूर्ण सहयोग रहा। वसुंधरा की युवा सृष्टि टीम ने मंच का सं...

भारत हथियार खरीदने के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक


अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भारत दुनिया के दूसरे देशों पर निर्भर है। कभी रूस से हथियार खरीदने वाला भारत अब दुनिया के दूसरे मुल्कों से भी हथियार खरीदने में पीछे नहीं है। फिर वह इजरायल हो या फिर अमेरिका। मेक इन इंडिया के नारे के बावजूद अब भी बड़ी रक्षा जरूरतें आयात पर निर्भर है और यही भारत को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा हथियार आयातक देश बनाता है।


2014 से 2018 के मध्य भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक देश था। इस अवधि के दौरान सऊदी अरब दुनिया का सबसे ज्यादा हथियार आयात करने वाला देश था। हथियारों के आयात में उसकी वैश्विक स्तर पर हिस्सेदारी 12 फीसद है।


वैश्विक स्तर पर 9.5 फीसद हिस्सेदारी


स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2014 से 2018 के मध्य प्रमुख हथियारों का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक था और वैश्विक स्तर पर उसकी हिस्सेदारी 9.5 फीसद थी।


 

 


हालांकि, 2009 से 2013 और 2014 से 2018 के बीच भारतीय आयात में 24 फीसद की कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, आंशिक रूप से ऐसा विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से लाइसेंस के तहत उत्पादित हथियारों की डिलीवरी में देरी के कारण हुआ है। जैसे 2001 में रूस को लड़ाकू विमान का और 2008 में फ्रांस से पनडुब्बियों का आदेश दिया गया था। 


 


रूस ने भारत को 58 फीसद हथियारों को किया आयात


2014-2018 के मध्य भारत की रक्षा जरूरतों को पूरा करने में रूस का बड़ा योगदान रहा है। रूस ने भारत को 58 फीसद हथियारों का आयात किया, जबकि 2009 में यह 76 फीसद था। 2014 से 2018 के मध्य इजरायल, अमेरिका और फ्रांस सभी ने भारत को अपने हथियारों का निर्यात बढ़ाया। हालांकि, भारतीय आयात में रूसी हिस्सेदारी अगले पांच साल की अवधि के दौरान तेजी से बढ़ने की संभावना है क्योंकि भारत ने हाल ही में कई बड़े रक्षा सौदों पर हस्ताक्षर किए हैं और कई पाइपलाइन में हैं। इनमें एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम, चार स्टील्थ फ्रिगेट, एके-203 असॉल्ट राइफलें, लीज पर दूसरी न्यूक्लियर अटैक पनडुब्बी और कामोव-226टी यूटिलिटी हेलिकॉप्टर, एमआइ-17 हेलीकॉप्टर और शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम के सौदे शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से संघर्ष के बावजूद, 2009-2013 की तुलना में 2014-2018 में दोनों देशों के हथियारों के आयात में कमी आई है। 


पाकिस्तान 11 वें स्थान पर


पाकिस्तान वैश्रि्वक आयात के मामले में 11वें स्थान पर रहा है। इस दौरान उसने वैश्रि्वक हथियारों का 2.7 फीसद आयात किया। उसके लिए हथियारों का सबसे बड़ा स्त्रोत चीन था, जिससे उसे करीब 70 फीसद हथियार उपलब्ध कराए। इसके बाद 8.9 फीसद हथियार अमेरिका से और रूस से 6 फीसद हथियारों का आयात किया।


 


हथियारों के सबसे बड़े निर्यातक देश


वैश्रि्वक स्तर पर, 2014-18 में प्रमुख हथियारों के अंतरराष्ट्रीय हस्तांतरण की मात्रा 2009-2013 की तुलना में 7.8 फीसद और 2004-2008 की तुलना में 23 फीसद अधिक थी। 2014-2018 में सबसे बड़े निर्यातक अमेरिका, रूस, फ्रांस, जर्मनी और चीन थे, जिनका 2014-2018 में हथियारों के निर्यात में कुल हिस्सा 75 फीसद था।


चीन भी प्रमुख हथियार निर्यातक के रूप में उभरा है। 2009-2013 की तुलना में 2014-2018 के लिए अपना हिस्सा 2.7 फीसद बढ़ाया है। चीन के सबसे बड़े ग्राहक पाकिस्तान और बांग्लादेश हैं।


जैसे ही भारतीय आयात कम हुआ, प्रमुख हथियारों का रूसी निर्यात 2009-2013 और 2014-2018 के बीच घटकर 17 फीसद रह गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह आंशिक रूप से भारतीय और वेनेजुएला के हथियारों के आयात में सामान्य कमी के कारण था, जो पिछले वषरें में रूसी हथियारों के निर्यात के मुख्य प्राप्तकर्ताओं में से रहे हैं।


 


 


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