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मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर गुरुद्वारा आलमबाग में आयोजित हुई विशेष अरदास

    लखनऊ। केंद्र सरकार के 12 वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा आलमबाग, लखनऊ में विशेष अरदास का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राज्यसभा सांसद एवं चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सरदार सतनाम सिंह संधू की ओर से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश की उन्नति, समृद्धि और जनकल्याण के लिए अरदास की गई। बड़ी संख्या में संगत उपस्थित रही और सभी ने राष्ट्र के विकास व सामाजिक सद्भाव के लिए गुरु घर में मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। सांसद सरदार सतनाम सिंह संधू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में देश ने विकास, सुशासन, आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं।  कार्यक्रम में लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, राजू गांधी और गिरीश मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे।  गुरुद्वारा आलमबाग की ओर से मनमोहन सिंह, भूपिंदर सिंह पिंदा, राजेंद्र सिंह राजू कार्यवाहक प्रधान, परविंदर सिंह, इकबाल सिंह, परमजीत सिंह बॉबी, इंदरपाल सिंह, त्रिलोक सिंह बहल और त्रिलोक सिंह टुटेजा ने भी कार्यक्रम में सहभाग...

भारत हथियार खरीदने के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक


अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भारत दुनिया के दूसरे देशों पर निर्भर है। कभी रूस से हथियार खरीदने वाला भारत अब दुनिया के दूसरे मुल्कों से भी हथियार खरीदने में पीछे नहीं है। फिर वह इजरायल हो या फिर अमेरिका। मेक इन इंडिया के नारे के बावजूद अब भी बड़ी रक्षा जरूरतें आयात पर निर्भर है और यही भारत को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा हथियार आयातक देश बनाता है।


2014 से 2018 के मध्य भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक देश था। इस अवधि के दौरान सऊदी अरब दुनिया का सबसे ज्यादा हथियार आयात करने वाला देश था। हथियारों के आयात में उसकी वैश्विक स्तर पर हिस्सेदारी 12 फीसद है।


वैश्विक स्तर पर 9.5 फीसद हिस्सेदारी


स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2014 से 2018 के मध्य प्रमुख हथियारों का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक था और वैश्विक स्तर पर उसकी हिस्सेदारी 9.5 फीसद थी।


 

 


हालांकि, 2009 से 2013 और 2014 से 2018 के बीच भारतीय आयात में 24 फीसद की कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, आंशिक रूप से ऐसा विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से लाइसेंस के तहत उत्पादित हथियारों की डिलीवरी में देरी के कारण हुआ है। जैसे 2001 में रूस को लड़ाकू विमान का और 2008 में फ्रांस से पनडुब्बियों का आदेश दिया गया था। 


 


रूस ने भारत को 58 फीसद हथियारों को किया आयात


2014-2018 के मध्य भारत की रक्षा जरूरतों को पूरा करने में रूस का बड़ा योगदान रहा है। रूस ने भारत को 58 फीसद हथियारों का आयात किया, जबकि 2009 में यह 76 फीसद था। 2014 से 2018 के मध्य इजरायल, अमेरिका और फ्रांस सभी ने भारत को अपने हथियारों का निर्यात बढ़ाया। हालांकि, भारतीय आयात में रूसी हिस्सेदारी अगले पांच साल की अवधि के दौरान तेजी से बढ़ने की संभावना है क्योंकि भारत ने हाल ही में कई बड़े रक्षा सौदों पर हस्ताक्षर किए हैं और कई पाइपलाइन में हैं। इनमें एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम, चार स्टील्थ फ्रिगेट, एके-203 असॉल्ट राइफलें, लीज पर दूसरी न्यूक्लियर अटैक पनडुब्बी और कामोव-226टी यूटिलिटी हेलिकॉप्टर, एमआइ-17 हेलीकॉप्टर और शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम के सौदे शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से संघर्ष के बावजूद, 2009-2013 की तुलना में 2014-2018 में दोनों देशों के हथियारों के आयात में कमी आई है। 


पाकिस्तान 11 वें स्थान पर


पाकिस्तान वैश्रि्वक आयात के मामले में 11वें स्थान पर रहा है। इस दौरान उसने वैश्रि्वक हथियारों का 2.7 फीसद आयात किया। उसके लिए हथियारों का सबसे बड़ा स्त्रोत चीन था, जिससे उसे करीब 70 फीसद हथियार उपलब्ध कराए। इसके बाद 8.9 फीसद हथियार अमेरिका से और रूस से 6 फीसद हथियारों का आयात किया।


 


हथियारों के सबसे बड़े निर्यातक देश


वैश्रि्वक स्तर पर, 2014-18 में प्रमुख हथियारों के अंतरराष्ट्रीय हस्तांतरण की मात्रा 2009-2013 की तुलना में 7.8 फीसद और 2004-2008 की तुलना में 23 फीसद अधिक थी। 2014-2018 में सबसे बड़े निर्यातक अमेरिका, रूस, फ्रांस, जर्मनी और चीन थे, जिनका 2014-2018 में हथियारों के निर्यात में कुल हिस्सा 75 फीसद था।


चीन भी प्रमुख हथियार निर्यातक के रूप में उभरा है। 2009-2013 की तुलना में 2014-2018 के लिए अपना हिस्सा 2.7 फीसद बढ़ाया है। चीन के सबसे बड़े ग्राहक पाकिस्तान और बांग्लादेश हैं।


जैसे ही भारतीय आयात कम हुआ, प्रमुख हथियारों का रूसी निर्यात 2009-2013 और 2014-2018 के बीच घटकर 17 फीसद रह गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह आंशिक रूप से भारतीय और वेनेजुएला के हथियारों के आयात में सामान्य कमी के कारण था, जो पिछले वषरें में रूसी हथियारों के निर्यात के मुख्य प्राप्तकर्ताओं में से रहे हैं।


 


 


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