Skip to main content

Featured Post

मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर गुरुद्वारा आलमबाग में आयोजित हुई विशेष अरदास

    लखनऊ। केंद्र सरकार के 12 वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा आलमबाग, लखनऊ में विशेष अरदास का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राज्यसभा सांसद एवं चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सरदार सतनाम सिंह संधू की ओर से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश की उन्नति, समृद्धि और जनकल्याण के लिए अरदास की गई। बड़ी संख्या में संगत उपस्थित रही और सभी ने राष्ट्र के विकास व सामाजिक सद्भाव के लिए गुरु घर में मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। सांसद सरदार सतनाम सिंह संधू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में देश ने विकास, सुशासन, आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं।  कार्यक्रम में लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, राजू गांधी और गिरीश मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे।  गुरुद्वारा आलमबाग की ओर से मनमोहन सिंह, भूपिंदर सिंह पिंदा, राजेंद्र सिंह राजू कार्यवाहक प्रधान, परविंदर सिंह, इकबाल सिंह, परमजीत सिंह बॉबी, इंदरपाल सिंह, त्रिलोक सिंह बहल और त्रिलोक सिंह टुटेजा ने भी कार्यक्रम में सहभाग...

मप्र को मिलने वाले पानी में राजस्थान सरकार ने की कटौती , फसलें सूखने का खतरा


चंबल की नहर से मप्र को मिलने वाले पानी में राजस्थान सरकार ने कटौती कर दी है। इसे लेकर राज्य सरकार ने राजस्थान सरकार के समक्ष आपत्ति की है। जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव एम गोपाल रेड्डी ने राजस्थान के प्रमुख सचिव (जल संसाधन) से बात कर कहा कि इस समय फसल को सबसे ज्यादा पानी की आवश्यकता है। इसमें कटौती न की जाए। मप्र के प्रमुख अभियंता एमएस डावर ने भी ताजा स्थिति की जानकारी रेड्डी को दी। रेड्डी ने कहा कि पानी समझौते के हिसाब से ही मिले, इसकी वे खुद समीक्षा करेंगे। 



क्षेत्र में पकने की स्थिति में खड़ी गेहूं की फसल में तीसरे पानी के लिए किसान नहरों पर टकटकी लगाए बैठे हैं। चंबल दाहिनी मुख्य नहर में 3500 क्यूसेक पानी की दरकार है, लेकिन राजस्थान ने मप्र के हिस्से का पानी अपनी डिस्ट्रीब्यूटरों में मोड़ रखा है। चंबल दाहिनी मुख्य नहर में शुक्रवार को मप्र की सीमा में पार्वती एक्वाडक्ट पर पानी की मात्रा घटकर 2800 क्यूसेक रह गई। यह करार से 1100 क्यूसेक कम है। हालांकि जल संसाधन विभाग कोटा के ईई संदीप सुहिल का कहना है कि चंबल की दाहिनी नहर में जलकुंभी होने से मप्र तक कम पानी पहुंच पा रहा है।


दूसरी तरफ आवदा बांध से निकली दोनों नहरें भी बंद पड़ी हैं। आवदा कमांड क्षेत्र के किसानों पर बरसों से बकाया सिंचाई कर जमा कराने का दबाव बनाने के लिए जल संसाधन विभाग ने 15 दिनों से नहरों में क्लोजर लगा रखा है।  इसके चलते श्योपुर, मुरैना और भिंड में लगभग 3 हजार करोड़ रुपए की फसलें सूखने का खतरा मंडरा रहा है।


Comments

Popular posts from this blog