ऐशबाग रामलीला मैदान के तुलसी सभागार मे श्री ओ. पी. श्रीवास्तव मेमोरियल स्कूल जो गरीब और मलीन बस्ती के बच्चो के लिए निशुल्क चलाया जाता है के वाषिर्कोत्सव का आयोजन वसुंधरा एन इनिशिएटिव के द्वारा किया गया। बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रदर्शन हुआ। स्कूल के संचालक श्री दीनानाथ जी 18 वर्षो से स्कूल शिक्षण का कार्य कर रहे हैं। प्रत्येक वर्ष इन बच्चों का मनोबल बढाने के लिए यह आयोजन किया जाता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री संजीत सिंह SrDEE (NR Railway)एवं श्रीअतुल कृष्ण सिंह( dipty secratary LDA)कर्नल मृदुल कुमार सिंह सेना मंडल रहे। मुख्य अतिथि ने अपने वक्तव्य मे कार्यक्रम को प्रेरणादायक और संदेशप्रद बताया एवं प्रधानाचार्या मीना देवी तथा समस्त शिक्षिकाओं की भूरि-भूरि प्रशंसा की। कार्यक्रम के आयोजनकर्ता वसुंधरा एन इनिशिएटिव की अध्यक्ष नीना सक्सेना, सरिता शुक्ला, उपाध्यक्ष डा अंजना त्रिपाठी, शंकर रोली, रूचि सिंह लखविन्दर कौर,ज्योति सिंह ऋतुजा सिंह बघेल,विभा तिवारी, वंदना श्रीवास्तव मधुलिका श्रीवास्तव का संपूर्ण सहयोग रहा। वसुंधरा की युवा सृष्टि टीम ने मंच का सं...

भगवान बुद्ध, जिन्हें हम गौतम बुद्ध के नाम से भी जानते हैं, उनकी मृत्यु ईस्वी पूर्व 483 में हुई थी। इस बात को हजारों साल बीत चुके हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि श्रीलंका में एक ऐसा अद्भुत मंदिर है, जहां आज भी भगवान बुद्ध के दांत रखे होने का दावा किया जाता है। कहते हैं कि यह दांत आज भी बढ़ रहा है। यह मंदिर श्रीलंका के कैंडी शहर में है।
इस मंदिर को 'दांत मंदिर' के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर उस कैंडी शहर में है, जो कभी श्रीलंका की राजधानी हुआ करता था। श्रीलंका के राजा यहां रहते थे। जब राजशाही का अंत हुआ, तब कैंडी में औपनिवेशिक आवाजाही बढ़ी। कैंडी का धार्मिक महत्व भी बहुत ज्यादा है, क्योंकि यहां अनेक महत्वपूर्ण बौद्ध मंदिर हैं।
कहते हैं कि भगवान बुद्ध के देह त्यागने के बाद उनका अंतिम संस्कार उत्तरप्रदेश के कुशीनगर में हुआ था, लेकिन उनके एक अनुयायी ने उनकी चिता पर से उनके दांत निकाल लिए और राजा ब्रह्मदत्त को दे दिया। कई वर्षों तक भगवान बुद्ध का वो दांत राजा ब्रह्मदत्त के पास रहा।
कहते हैं कि भगवान बुद्ध के दांत के लिए कई लड़ाईयां लड़ी गईं। वो दांत कई राजाओं के पास गया और आया। आखिर में भगवान बुद्ध के ही एक अनुयायी ने चोरी-छुपे उस दांत को श्रीलंका पहुंचा दिया। प्राचीन समय में कैंडी के एक राजा ने अपने महल के पास ही भगवान बुद्ध के दांत के लिए एक विशाल भव्य मंदिर बनवाया और तब से वह दांत उसी भव्य मंदिर में रखा हुआ है।
हालांकि वर्ष 1603 में जब पुर्तगालियों ने श्रीलंका पर हमला किया, तो भगवान बुद्ध के उस दांत को रक्षा के लिए दुम्बारा ले जाया गया, लेकिन बाद में फिर उसे कैंडी लाया गया। यह दांत एक छोटी सी डिबिया में रखा हुआ है। मंदिर में जाने वाले लोग उस दांत के दर्शन कर सकते हैं। हालांकि डिबिया खोलकर किसी को भी वो दांत नहीं दिखाया जाता है।
हर बुधवार को भगवान बुद्ध के पवित्र दांत को सुगंधित फूल मानुमुरा मंगलया से बने सुगंधित पानी से प्रतीकात्मक तौर पर स्नान कराया जाता है। इसके बाद इस पवित्र जल को श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। इस जल को चंगाई की शक्तियों से युक्त माना जाता है।
साल 2017 में जब प्रधानमंत्री मोदी श्रीलंका गए थे, तो उन्होंने भी इस दंत अवशेष मंदिर और भगवान बुद्ध के पवित्र दांत के दर्शन किए थे। इस दौरान उनके साथ श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना भी थे। प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर में पुष्पांजलि भी अर्पित की थी।
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