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बलरामपुर: तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की घोर लापरवाही, बड़ी आंत काटी, गर्भ में ही फंसा रहा मृत बच्चा

बलरामपुर। जिले के तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रसूता के पति *पवन कुमार मिश्रा* ने अस्पताल के *डॉ. आलोक सिंह* पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पवन मिश्रा ने बताया कि उनकी पत्नी 6 माह की गर्भवती थी, तबीयत खराब होने पर उसे तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर ने बताया कि गर्भ में बच्चे की मौत हो चुकी है और ऑपरेशन कर बच्चे को बाहर निकालना पड़ेगा। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने लापरवाही बरतते हुए प्रसूता की *बड़ी आंत काट दी* और मृत बच्चे को गर्भ में ही छोड़ दिया, जिससे प्रसूता की हालत और बिगड़ गई। जब पवन कुमार मिश्रा अपनी पत्नी को दूसरे अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में ही मृत बच्चे की डिलीवरी हो गई। बाद में पत्नी को गोंडा और फिर लखनऊ रेफर किया गया। वह अभी जीवित है लेकिन हालत नाजुक बनी हुई है। पवन मिश्रा ने डॉक्टर पर धमकी देने और समझौते का दबाव बनाने का भी आरोप लगाते हुए FIR की मांग की है। पीड़ित के साथ खड़े हुए हनुमान प्रसाद  इस मामले में अब *किसान मजदूर संघर्ष पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान प्रसाद* पीड़ित पति पवन कुमार मिश्रा को...

श्रीलंका का वो मंदिर, आज भी रखा हुआ है

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भगवान बुद्ध, जिन्हें हम गौतम बुद्ध के नाम से भी जानते हैं, उनकी मृत्यु ईस्वी पूर्व 483 में हुई थी। इस बात को हजारों साल बीत चुके हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि श्रीलंका में एक ऐसा अद्भुत मंदिर है, जहां आज भी भगवान बुद्ध के दांत रखे होने का दावा किया जाता है। कहते हैं कि यह दांत आज भी बढ़ रहा है। यह मंदिर श्रीलंका के कैंडी शहर में है। 




इस मंदिर को 'दांत मंदिर' के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर उस कैंडी शहर में है, जो कभी श्रीलंका की राजधानी हुआ करता था। श्रीलंका के राजा यहां रहते थे। जब राजशाही का अंत हुआ, तब कैंडी में औपनिवेशिक आवाजाही बढ़ी। कैंडी का धार्मिक महत्व भी बहुत ज्यादा है, क्योंकि यहां अनेक महत्वपूर्ण बौद्ध मंदिर हैं। 




कहते हैं कि भगवान बुद्ध के देह त्यागने के बाद उनका अंतिम संस्कार उत्तरप्रदेश के कुशीनगर में हुआ था, लेकिन उनके एक अनुयायी ने उनकी चिता पर से उनके दांत निकाल लिए और राजा ब्रह्मदत्त को दे दिया। कई वर्षों तक भगवान बुद्ध का वो दांत राजा ब्रह्मदत्त के पास रहा। 




कहते हैं कि भगवान बुद्ध के दांत के लिए कई लड़ाईयां लड़ी गईं। वो दांत कई राजाओं के पास गया और आया। आखिर में भगवान बुद्ध के ही एक अनुयायी ने चोरी-छुपे उस दांत को श्रीलंका पहुंचा दिया। प्राचीन समय में कैंडी के एक राजा ने अपने महल के पास ही भगवान बुद्ध के दांत के लिए एक विशाल भव्य मंदिर बनवाया और तब से वह दांत उसी भव्य मंदिर में रखा हुआ है। 




हालांकि वर्ष 1603 में जब पुर्तगालियों ने श्रीलंका पर हमला किया, तो भगवान बुद्ध के उस दांत को रक्षा के लिए दुम्बारा ले जाया गया, लेकिन बाद में फिर उसे कैंडी लाया गया। यह दांत एक छोटी सी डिबिया में रखा हुआ है। मंदिर में जाने वाले लोग उस दांत के दर्शन कर सकते हैं। हालांकि डिबिया खोलकर किसी को भी वो दांत नहीं दिखाया जाता है।


हर बुधवार को भगवान बुद्ध के पवित्र दांत को सुगंधित फूल मानुमुरा मंगलया से बने सुगंधित पानी से प्रतीकात्मक तौर पर स्नान कराया जाता है। इसके बाद इस पवित्र जल को श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। इस जल को चंगाई की शक्तियों से युक्त माना जाता है। 




साल 2017 में जब प्रधानमंत्री मोदी श्रीलंका गए थे, तो उन्होंने भी इस दंत अवशेष मंदिर और भगवान बुद्ध के पवित्र दांत के दर्शन किए थे। इस दौरान उनके साथ श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना भी थे। प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर में पुष्पांजलि भी अर्पित की थी। 
















 



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