लखनऊ। केंद्र सरकार के 12 वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा आलमबाग, लखनऊ में विशेष अरदास का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राज्यसभा सांसद एवं चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सरदार सतनाम सिंह संधू की ओर से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश की उन्नति, समृद्धि और जनकल्याण के लिए अरदास की गई। बड़ी संख्या में संगत उपस्थित रही और सभी ने राष्ट्र के विकास व सामाजिक सद्भाव के लिए गुरु घर में मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। सांसद सरदार सतनाम सिंह संधू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में देश ने विकास, सुशासन, आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। कार्यक्रम में लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, राजू गांधी और गिरीश मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे। गुरुद्वारा आलमबाग की ओर से मनमोहन सिंह, भूपिंदर सिंह पिंदा, राजेंद्र सिंह राजू कार्यवाहक प्रधान, परविंदर सिंह, इकबाल सिंह, परमजीत सिंह बॉबी, इंदरपाल सिंह, त्रिलोक सिंह बहल और त्रिलोक सिंह टुटेजा ने भी कार्यक्रम में सहभाग...

भगवान बुद्ध, जिन्हें हम गौतम बुद्ध के नाम से भी जानते हैं, उनकी मृत्यु ईस्वी पूर्व 483 में हुई थी। इस बात को हजारों साल बीत चुके हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि श्रीलंका में एक ऐसा अद्भुत मंदिर है, जहां आज भी भगवान बुद्ध के दांत रखे होने का दावा किया जाता है। कहते हैं कि यह दांत आज भी बढ़ रहा है। यह मंदिर श्रीलंका के कैंडी शहर में है।
इस मंदिर को 'दांत मंदिर' के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर उस कैंडी शहर में है, जो कभी श्रीलंका की राजधानी हुआ करता था। श्रीलंका के राजा यहां रहते थे। जब राजशाही का अंत हुआ, तब कैंडी में औपनिवेशिक आवाजाही बढ़ी। कैंडी का धार्मिक महत्व भी बहुत ज्यादा है, क्योंकि यहां अनेक महत्वपूर्ण बौद्ध मंदिर हैं।
कहते हैं कि भगवान बुद्ध के देह त्यागने के बाद उनका अंतिम संस्कार उत्तरप्रदेश के कुशीनगर में हुआ था, लेकिन उनके एक अनुयायी ने उनकी चिता पर से उनके दांत निकाल लिए और राजा ब्रह्मदत्त को दे दिया। कई वर्षों तक भगवान बुद्ध का वो दांत राजा ब्रह्मदत्त के पास रहा।
कहते हैं कि भगवान बुद्ध के दांत के लिए कई लड़ाईयां लड़ी गईं। वो दांत कई राजाओं के पास गया और आया। आखिर में भगवान बुद्ध के ही एक अनुयायी ने चोरी-छुपे उस दांत को श्रीलंका पहुंचा दिया। प्राचीन समय में कैंडी के एक राजा ने अपने महल के पास ही भगवान बुद्ध के दांत के लिए एक विशाल भव्य मंदिर बनवाया और तब से वह दांत उसी भव्य मंदिर में रखा हुआ है।
हालांकि वर्ष 1603 में जब पुर्तगालियों ने श्रीलंका पर हमला किया, तो भगवान बुद्ध के उस दांत को रक्षा के लिए दुम्बारा ले जाया गया, लेकिन बाद में फिर उसे कैंडी लाया गया। यह दांत एक छोटी सी डिबिया में रखा हुआ है। मंदिर में जाने वाले लोग उस दांत के दर्शन कर सकते हैं। हालांकि डिबिया खोलकर किसी को भी वो दांत नहीं दिखाया जाता है।
हर बुधवार को भगवान बुद्ध के पवित्र दांत को सुगंधित फूल मानुमुरा मंगलया से बने सुगंधित पानी से प्रतीकात्मक तौर पर स्नान कराया जाता है। इसके बाद इस पवित्र जल को श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। इस जल को चंगाई की शक्तियों से युक्त माना जाता है।
साल 2017 में जब प्रधानमंत्री मोदी श्रीलंका गए थे, तो उन्होंने भी इस दंत अवशेष मंदिर और भगवान बुद्ध के पवित्र दांत के दर्शन किए थे। इस दौरान उनके साथ श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना भी थे। प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर में पुष्पांजलि भी अर्पित की थी।
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