लखनऊ। केंद्र सरकार के 12 वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा आलमबाग, लखनऊ में विशेष अरदास का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राज्यसभा सांसद एवं चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सरदार सतनाम सिंह संधू की ओर से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश की उन्नति, समृद्धि और जनकल्याण के लिए अरदास की गई। बड़ी संख्या में संगत उपस्थित रही और सभी ने राष्ट्र के विकास व सामाजिक सद्भाव के लिए गुरु घर में मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। सांसद सरदार सतनाम सिंह संधू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में देश ने विकास, सुशासन, आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। कार्यक्रम में लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, राजू गांधी और गिरीश मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे। गुरुद्वारा आलमबाग की ओर से मनमोहन सिंह, भूपिंदर सिंह पिंदा, राजेंद्र सिंह राजू कार्यवाहक प्रधान, परविंदर सिंह, इकबाल सिंह, परमजीत सिंह बॉबी, इंदरपाल सिंह, त्रिलोक सिंह बहल और त्रिलोक सिंह टुटेजा ने भी कार्यक्रम में सहभाग...
पिछले महीने दीपिका पादुकोण की फिल्म छपाक के बहिष्कार का सोशल मीडिया पर अभियान चलाने वाला गुट अब तापसी पन्नू की नई फिल्म थप्पड़ के खिलाफ सक्रिय हो गया है। तापसी की इस फिल्म के निर्देशक अनुभव सिन्हा पर बढ़ चढ़कर सरकार की कई मुद्दों पर मुखालिफत करते रहे हैं। लेकिन, तापसी ने दीपिका की तरह शांत रहने के बजाय सोशल मीडिया पर भी अपना मोर्चा खोल लिया है।
शुक्रवार ही को तापसी की फिल्म 'थप्पड़' सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इस फिल्म को लेकर ट्रोलर्स ने सोशल मीडिया पर तापसी पन्नू को घेरने की कोशिश की, लेकिन तापसी ने ट्रोलर्स को शानदार जवाब देकर उनकी बोलती बंद कर दी। ट्रोलर्स के लिए तापसी ने लिखा, 'हम बहुत खुश हैं कि हमने सोशल मीडिया पर बैठे बेरोजगारों को काम पर लगा दिया। मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगी, क्योंकि मैं ऐसे नाकारों को ज्यादा महत्व नहीं देना चाहती।'
तापसी ने मुंबई में सीएए और एनआरसी के विरोध में चल रही एक बैठक में भाग लिया था, जिसके बाद इन दोनों बिलों के समर्थकों ने उस समय तापसी को राष्ट्र विरोधी कहना शुरू कर दिया था। ऐसी ही घटना दीपिका पादुकोण के साथ भी हुई थी, जब उन्होंने अपनी फिल्म 'छपाक' के रिलीज होने से पहले जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में जाकर सरकार की नीतियों के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया था। दीपिका के इस कदम का सीधा असर उनकी फिल्म के प्रदर्शन पर हुआ था।
तापसी की इस फिल्म का मकसद घरेलू हिंसा के बारे में लोगों को सचेत कराना है। इस पर तापसी कहती हैं, 'थप्पड़ से डर नहीं लगता साहब प्यार से लगता है' वाले कल्चर को अब बदलने की जरूरत है। आशा है कि 'थप्पड़' इसको बदलने में कामयाब रहेगी।'
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