लखनऊ। केंद्र सरकार के 12 वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा आलमबाग, लखनऊ में विशेष अरदास का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राज्यसभा सांसद एवं चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सरदार सतनाम सिंह संधू की ओर से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश की उन्नति, समृद्धि और जनकल्याण के लिए अरदास की गई। बड़ी संख्या में संगत उपस्थित रही और सभी ने राष्ट्र के विकास व सामाजिक सद्भाव के लिए गुरु घर में मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। सांसद सरदार सतनाम सिंह संधू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में देश ने विकास, सुशासन, आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। कार्यक्रम में लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, राजू गांधी और गिरीश मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे। गुरुद्वारा आलमबाग की ओर से मनमोहन सिंह, भूपिंदर सिंह पिंदा, राजेंद्र सिंह राजू कार्यवाहक प्रधान, परविंदर सिंह, इकबाल सिंह, परमजीत सिंह बॉबी, इंदरपाल सिंह, त्रिलोक सिंह बहल और त्रिलोक सिंह टुटेजा ने भी कार्यक्रम में सहभाग...
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में भारत की आपत्तियों के बावजूद चीन अरबों डॉलर के सीपीईसी के तहत निर्माण कार्य तेज कर रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट में मंगलवार को बताया गया कि चीन ने सीपीईसी के तहत पीओके में 1124 मेगावाट की एक बिजली परियोजना को हरी झंडी दिखा दी है।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कोहाला जलविद्युत परियोजना का ब्योरा सोमवार को पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री उमर अयूब की अध्यक्षता वाली प्राइवेट पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड (पीपीआईबी) की 127वीं बैठक के दौरान पेश किया गया। बैठक में बताया गया कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के तहत 1124 मेगावाट की कोहाला जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए एक त्रिपक्षीय समझौता किया गया है, जिस पर चीन की थ्री गॉर्जेज कॉरपोरेशन, पीओके के अधिकारी और पीपीआईबी ने हस्ताक्षर किए हैं। झेलम नदी पर बनने वाली इस परियोजना पर करीब 2.4 अरब डॉलर का खर्च आएगा।
पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर और लद्दाख के गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरने वाले 3000 किलोमीटर लंबे सीपीईसी का निर्माण चीन और पाकिस्तान मिलकर कर रहे हैं। इसके तहत चीन के शिनजियांग राज्य को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से रेल, सड़क, पाइपलाइन और ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क के जरिये जोड़ा जाना है। भारत लगातार इसे अपनी संप्रभुता का हनन बताते हुए इस पर आपत्ति जता रहा है।
दो महीने में दूसरी परियोजना
बता दें कि विवादित क्षेत्र में यह एक महीने के अंदर दूसरी बड़ी परियोजना है, जिसका निर्माण पाकिस्तान और चीन मिलकर करेंगे। पिछले महीने गिलगित-बाल्टिस्तान में 442 अरब डॉलर की लागत से एक बांध बनाने की परियोजना पर चीन की सरकारी कंपनी और पाकिस्तानी सेना की कॉमर्शियल शाखा ने हस्ताक्षर किए थे। भारत ने अपनी जमीन पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे की बात दोहराते हुए इस परियोजना पर आपत्ति जताई थी।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कोहाला जलविद्युत परियोजना का ब्योरा सोमवार को पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री उमर अयूब की अध्यक्षता वाली प्राइवेट पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड (पीपीआईबी) की 127वीं बैठक के दौरान पेश किया गया। बैठक में बताया गया कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के तहत 1124 मेगावाट की कोहाला जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए एक त्रिपक्षीय समझौता किया गया है, जिस पर चीन की थ्री गॉर्जेज कॉरपोरेशन, पीओके के अधिकारी और पीपीआईबी ने हस्ताक्षर किए हैं। झेलम नदी पर बनने वाली इस परियोजना पर करीब 2.4 अरब डॉलर का खर्च आएगा।
पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर और लद्दाख के गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरने वाले 3000 किलोमीटर लंबे सीपीईसी का निर्माण चीन और पाकिस्तान मिलकर कर रहे हैं। इसके तहत चीन के शिनजियांग राज्य को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से रेल, सड़क, पाइपलाइन और ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क के जरिये जोड़ा जाना है। भारत लगातार इसे अपनी संप्रभुता का हनन बताते हुए इस पर आपत्ति जता रहा है।
दो महीने में दूसरी परियोजना
बता दें कि विवादित क्षेत्र में यह एक महीने के अंदर दूसरी बड़ी परियोजना है, जिसका निर्माण पाकिस्तान और चीन मिलकर करेंगे। पिछले महीने गिलगित-बाल्टिस्तान में 442 अरब डॉलर की लागत से एक बांध बनाने की परियोजना पर चीन की सरकारी कंपनी और पाकिस्तानी सेना की कॉमर्शियल शाखा ने हस्ताक्षर किए थे। भारत ने अपनी जमीन पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे की बात दोहराते हुए इस परियोजना पर आपत्ति जताई थी।
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