लखनऊ। केंद्र सरकार के 12 वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा आलमबाग, लखनऊ में विशेष अरदास का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राज्यसभा सांसद एवं चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सरदार सतनाम सिंह संधू की ओर से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश की उन्नति, समृद्धि और जनकल्याण के लिए अरदास की गई। बड़ी संख्या में संगत उपस्थित रही और सभी ने राष्ट्र के विकास व सामाजिक सद्भाव के लिए गुरु घर में मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। सांसद सरदार सतनाम सिंह संधू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में देश ने विकास, सुशासन, आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। कार्यक्रम में लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, राजू गांधी और गिरीश मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे। गुरुद्वारा आलमबाग की ओर से मनमोहन सिंह, भूपिंदर सिंह पिंदा, राजेंद्र सिंह राजू कार्यवाहक प्रधान, परविंदर सिंह, इकबाल सिंह, परमजीत सिंह बॉबी, इंदरपाल सिंह, त्रिलोक सिंह बहल और त्रिलोक सिंह टुटेजा ने भी कार्यक्रम में सहभाग...
पूरी दुनिया में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इस वायरस का इलाज ढूंढने के भी प्रयास काफी तेजी से चल रहे हैं। इस बीच लंदन में चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिक यह पता लगाने के लिए परीक्षण कर रहे हैं कि क्या आम दर्द निवारक और सूजन-रोधी दवा आइबूप्रोफेन कोविड-19 के मरीजों के इलाज में मदद कर सकती है? क्या यह मरीजों की श्वसन संबंधी समस्या को घातक होने से रोक सकती है? लंदन के गायज अस्पताल, सेंट थॉमस अस्पताल और किंग्स कॉलेज के शोधकर्ताओं की एक टीम इसी बात को लेकर परीक्षण कर रही है। शोधकर्ताओं का कहना है कि वह यह जानना चाहते हैं कि क्या दर्द निवारक दवा आइबूप्रोफेन का उपयोग कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज के लिए किया जा सकता है? क्या यह उनकी सांस संबंधी तकलीक को कम कर सकती है और मरीजों को वेंटिलेटर पर ले जाने से रोक सकती है?
बता दें कि दुनिया भर में लगभग 180 देशों में कोविड-19 महामारी के कारण हो मौतों के बीच वैज्ञानिक और शोधकर्ता इसका सस्ता उपचार खोजने की कोशिश में जुटे हुए हैं। इसके साथ ही वह कम लागत वाले उपचार से अस्पतालों और चिकित्सा सुविधाओं पर बोझ कम करने और रोगियों को वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ने जैसे उपायों पर भी काम कर रहे हैं।

बहरहाल, लंदन में जारी अध्ययन में आइबूप्रोफेन के एक अन्य प्रकार फ्लारिन को शामिल किया गया है। यह यूनाइटेड किंगडम में उपलब्ध है। साथ ही आइबूप्रोफेन के मानक संस्करण से इसकी रासायनिक संरचना थोड़ी अलग है। इस अध्ययन के लिए गायज अस्पताल और सेंट थॉमस एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट, किंग्स कॉलेज लंदन और एसईईके एक ड्रग-रिसर्च फर्म माध्यम से एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। यदि यह परीक्षण सफल होता है तो यह कोविड-19 महामारी के दौरान दवा की खोज की दिशा को बदल सकता है। इस परीक्षण को लिबरेट नाम दिया गया है, इसे तब शुरू किया गया जब इस बात का पता चला कि इस दवा से जानवरों में तीव्र श्वसन सिंड्रोम से जुड़ी जटिलता में से एक का इलाज हो सकता है।शोधकर्ताओं के अनुसार इस परीक्षण के दौरान कुछ मरीजों को सामान्य मानक उपचार दिया जाएगा, जबकि कुछ मरीजों को मानक उपचार के साथ अतिरिक्त दवाएं दी जाएंगी। सामान्य मानक उपचार वाले मरीजों को लगातार ऑक्सीजन भी दी जाएगी।
बता दें कि दुनिया भर में लगभग 180 देशों में कोविड-19 महामारी के कारण हो मौतों के बीच वैज्ञानिक और शोधकर्ता इसका सस्ता उपचार खोजने की कोशिश में जुटे हुए हैं। इसके साथ ही वह कम लागत वाले उपचार से अस्पतालों और चिकित्सा सुविधाओं पर बोझ कम करने और रोगियों को वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ने जैसे उपायों पर भी काम कर रहे हैं।
बहरहाल, लंदन में जारी अध्ययन में आइबूप्रोफेन के एक अन्य प्रकार फ्लारिन को शामिल किया गया है। यह यूनाइटेड किंगडम में उपलब्ध है। साथ ही आइबूप्रोफेन के मानक संस्करण से इसकी रासायनिक संरचना थोड़ी अलग है। इस अध्ययन के लिए गायज अस्पताल और सेंट थॉमस एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट, किंग्स कॉलेज लंदन और एसईईके एक ड्रग-रिसर्च फर्म माध्यम से एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। यदि यह परीक्षण सफल होता है तो यह कोविड-19 महामारी के दौरान दवा की खोज की दिशा को बदल सकता है। इस परीक्षण को लिबरेट नाम दिया गया है, इसे तब शुरू किया गया जब इस बात का पता चला कि इस दवा से जानवरों में तीव्र श्वसन सिंड्रोम से जुड़ी जटिलता में से एक का इलाज हो सकता है।शोधकर्ताओं के अनुसार इस परीक्षण के दौरान कुछ मरीजों को सामान्य मानक उपचार दिया जाएगा, जबकि कुछ मरीजों को मानक उपचार के साथ अतिरिक्त दवाएं दी जाएंगी। सामान्य मानक उपचार वाले मरीजों को लगातार ऑक्सीजन भी दी जाएगी।
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