लखनऊ। केंद्र सरकार के 12 वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा आलमबाग, लखनऊ में विशेष अरदास का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राज्यसभा सांसद एवं चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सरदार सतनाम सिंह संधू की ओर से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश की उन्नति, समृद्धि और जनकल्याण के लिए अरदास की गई। बड़ी संख्या में संगत उपस्थित रही और सभी ने राष्ट्र के विकास व सामाजिक सद्भाव के लिए गुरु घर में मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। सांसद सरदार सतनाम सिंह संधू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में देश ने विकास, सुशासन, आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। कार्यक्रम में लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, राजू गांधी और गिरीश मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे। गुरुद्वारा आलमबाग की ओर से मनमोहन सिंह, भूपिंदर सिंह पिंदा, राजेंद्र सिंह राजू कार्यवाहक प्रधान, परविंदर सिंह, इकबाल सिंह, परमजीत सिंह बॉबी, इंदरपाल सिंह, त्रिलोक सिंह बहल और त्रिलोक सिंह टुटेजा ने भी कार्यक्रम में सहभाग...
चुनाव से पहले ममता बनर्जी को मिला ब्रह्मास्त्र, दौड़े-दौड़े सुप्रीम कोर्ट पहुंची केंद्र सरकार, अब होगा असली खेला
Bengal News: कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल में 1 अगस्त से मनरेगा योजना शुरू करने का आदेश दिया, जिससे ममता बनर्जी को चुनावी संजीवनी मिली. केंद्र सरकार ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आया है. केंद्र सरकार ने सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. दरअसल कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य में 1 अगस्त से मनरेगा योजना दोबारा शुरू करने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को यह आदेश देते हुए सख्त टिप्पणी भी की थी. अदालत ने कि इस योजना को ‘हमेशा के लिए ठंडे बस्ते’ में नहीं डाला जा सकता.
कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस शिवगणनम ने 19 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान कहा था कि अगर किसी ने फर्जी नामों से मजदूरी ली है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन जिन्होंने ईमानदारी से काम किया है उन्हें उनका हक मिलना चाहिए. कोर्ट ने साफ कहा कि केंद्र चाहे तो योजना में कड़े नियम और शर्तें लागू करे, लेकिन मजदूरों का हक रोका नहीं जा सकता.
ममता बनर्जी की संजीवनी बनेगा मनरेगा!
बंगाल चुनाव से पहले कोर्ट के इस आदेश को ममता बनर्जी सरकार के लिए ब्रह्मास्त्र माना जा रहा था, जिससे बीजेपी की टेंशन बढ़ सकती है. राज्य की मुख्यमंत्री आरोप लगाती रही हैं कि केंद्र ने तीन साल से बंगाल का मनरेगा फंड रोक रखा है, जिससे लाखों मजदूर प्रभावित हुए.
क्या है मनरेगा योजना?
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा केंद्र सरकार की तरफ से शुरू की गई रोजगार गारंटी योजना है. इसका मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में सभी लोगों को हर साल 100 दिन के रोजगार प्रदान करके ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है. इस योजना के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले वयस्क सदस्यों को मजदूरी का काम मिलता है.
केंद्र ने क्यों रोका था बंगाल का मनरेगा फंड?
पश्चिम बंगाल में मौटे तौर पर 3.4 करोड़ रजिस्टर्ड मनरेगा वर्कर हैं. मनरेगा मजदूरों के वेतन का 90 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार के खजाने से जाता है. केंद्र सरकार ने मनरेगा में भारी अनियमित्ताओं को देखते हुए वर्ष 2021 में फंड रोक दिया था. दरअसल तब केंद्रीय ग्रामीण मंत्रालय की तरफ से 63 जगहों पर मनरेगा मजदूरों की जांच की गई थी, जिनमें से 31 में गड़बड़ी पाई गई थी. इसके बाद ही केंद्र ने फंड रोकने का फैसला लिया था.
सुप्रीम कोर्ट पहुंची केंद्र सरकार
ममता बनर्जी की इस बात पर बीजेपी विधायक भड़क उठे थे. मामला इतना बढ़ गया था कि एक बीजेपी विधायक को निलंबित भी कर दिया गया था.
अब हाईकोर्ट के फैसले ने ममता को चुनाव से पहले बड़ा हथियार दे दिया है. लेकिन असली राजनीतिक टकराव अभी बाकी है, क्योंकि केंद्र सरकार ने अब इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है. यानि आने वाले दिनों में मनरेगा की जंग दिल्ली से लेकर कोलकाता और सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी जाएगी. और इस पर पूरे चुनावी मौसम में ‘खेला’ होना तय है.
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