लखनऊ। केंद्र सरकार के 12 वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा आलमबाग, लखनऊ में विशेष अरदास का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राज्यसभा सांसद एवं चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सरदार सतनाम सिंह संधू की ओर से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश की उन्नति, समृद्धि और जनकल्याण के लिए अरदास की गई। बड़ी संख्या में संगत उपस्थित रही और सभी ने राष्ट्र के विकास व सामाजिक सद्भाव के लिए गुरु घर में मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। सांसद सरदार सतनाम सिंह संधू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में देश ने विकास, सुशासन, आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। कार्यक्रम में लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, राजू गांधी और गिरीश मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे। गुरुद्वारा आलमबाग की ओर से मनमोहन सिंह, भूपिंदर सिंह पिंदा, राजेंद्र सिंह राजू कार्यवाहक प्रधान, परविंदर सिंह, इकबाल सिंह, परमजीत सिंह बॉबी, इंदरपाल सिंह, त्रिलोक सिंह बहल और त्रिलोक सिंह टुटेजा ने भी कार्यक्रम में सहभाग...
चिकित्सकों की सेवा शर्तों, स्थानांतरण नीति और निलंबन प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर बिंदु सामने आए हैं। एक लिखित ज्ञापन में चिकित्सक संगठनों ने शासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कई मांगें रखी हैं।
स्थानांतरण नीति 2020-21 पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि 15-20 वर्ष से एक ही जगह जमे चिकित्सकों का स्थानांतरण नहीं किया जा रहा है। मांग है कि ऐसे चिकित्सकों का तबादला किया जाए। इसमें P-2 संलग्नक में कुछ नामों का उल्लेख भी किया गया है।
बेनेवोलेंट फंड स्कीम BFS का लाभ 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके सेवानिवृत्त चिकित्सकों को नहीं मिल पा रहा है। नियमों में प्रावधान होने के बावजूद किसी भी मद में भुगतान नहीं किया गया। मांग है कि यह स्कीम पूर्व चिकित्सकों की आकस्मिकता के दौरान सहायता के लिए बनाई गई थी, इसे लागू किया जाए।
सरकारी डॉक्टरों का निलंबन तत्काल कर दिया जाता है, लेकिन जांच वर्षों तक लंबित रहती है। नियमावली में 90 दिन में जांच पूरी करने का प्रावधान है, पर दबाव या राजनीतिक कारणों से ऐसा नहीं हो रहा। इससे चिकित्सकों का मनोबल गिरता है और जनता पर असर पड़ता है। मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
PMS सर्विस में चिकित्सकों के आने और जनमानस को लाभ देने के लिए मेडिकल मोर्टेशन पोस्ट-12 का क्रियान्वयन प्रभावी तरीके से करने की मांग उठी है।
X-DGMH और सिविल सर्जन पद पर एक ऐसे चिकित्सक डा. राजीव भसीन को संयुक्त रूप से पोस्टिंग दी गई, जिस पर NRHM घोटाले का आरोप है। तत्कालीन AD MH डा. ब्रजेश राठौर ने भी इसे अनुचित बताया था। मांग है कि ऐसे अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर न लगाया जाए और जांच लंबित होने पर स्थानांतरण न किया जाए।
जनपद औरैया के एक BPM का उदाहरण देते हुए कहा गया कि वरिष्ठ साथी को जूनियर बनाकर प्रमोशन दिया गया। डा. अर्चना श्रीवास्तव को स्वास्थ्य मंत्री व अन्य अधिकारियों के सहयोग से पदोन्नति देने का आरोप है। मांग है कि निष्पक्ष जांच हो और भेदभाव खत्म हो।
जनपद औरैया में High Court के आदेश के बावजूद लीव सेंक्शन नहीं किया गया। मेडिकल मोटिवेशन एक्ट-12 में प्रमोशन के बावजूद लाभ नहीं दिया गया। 34 मुलायम मंत्री प्रसाद मौर्य से अनुरोध है कि ऐसे अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई हो।
ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान परिस्थिति और इनके परिवार पर बुरा असर पड़ रहा है। शासन से अनुरोध है कि इन सभी बिंदुओं पर जांच कर तत्काल कार्रवाई की जाए। डा. पवन कुमार अरोड़ा के मामले में भी जांच और कार्रवाई की मांग की गई है। चिकित्सक संगठनों ने मा. योगी सरकार की Zero Tolerance नीति के तहत भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की अपील की है।
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