बलरामपुर। जिले के तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रसूता के पति *पवन कुमार मिश्रा* ने अस्पताल के *डॉ. आलोक सिंह* पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पवन मिश्रा ने बताया कि उनकी पत्नी 6 माह की गर्भवती थी, तबीयत खराब होने पर उसे तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर ने बताया कि गर्भ में बच्चे की मौत हो चुकी है और ऑपरेशन कर बच्चे को बाहर निकालना पड़ेगा। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने लापरवाही बरतते हुए प्रसूता की *बड़ी आंत काट दी* और मृत बच्चे को गर्भ में ही छोड़ दिया, जिससे प्रसूता की हालत और बिगड़ गई। जब पवन कुमार मिश्रा अपनी पत्नी को दूसरे अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में ही मृत बच्चे की डिलीवरी हो गई। बाद में पत्नी को गोंडा और फिर लखनऊ रेफर किया गया। वह अभी जीवित है लेकिन हालत नाजुक बनी हुई है। पवन मिश्रा ने डॉक्टर पर धमकी देने और समझौते का दबाव बनाने का भी आरोप लगाते हुए FIR की मांग की है। पीड़ित के साथ खड़े हुए हनुमान प्रसाद इस मामले में अब *किसान मजदूर संघर्ष पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान प्रसाद* पीड़ित पति पवन कुमार मिश्रा को...
NEET UG का नाम पिछले दो साल से लगातार विवादों में घिरा है। 2025 में इंदौर के सेंटरों पर बिजली चली गई और छात्र अंधेरे में पेपर लिखते रहे, वहीं बायोमेट्रिक सिस्टम भी कई जगह फेल हो गया। 2026 में तो हद ही हो गई जब 3 मई को हुए एग्जाम को पेपर लीक के चलते 12 मई को पूरी तरह रद्द करना पड़ा। NTA ने माना कि मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती और मामला CBI को सौंप दिया गया। ऐसे में डॉ. अलगावेंकटेशन का यह तर्क बहुत वाजिब लगता है कि अगर जांच में यह साबित होता है कि गड़बड़ी सिर्फ कुछ राज्यों या सेंटरों तक सीमित थी, तो पूरे देश में दोबारा परीक्षा लेना लाखों निर्दोष छात्रों के साथ नाइंसाफी है। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर साबित कर दिया कि NTA को आमूलचूल बदलाव की ज़रूरत है। इसकी शुरुआत पारदर्शिता से होनी चाहिए। 2025 और 2026 दोनों साल की जांच रिपोर्ट को बिना किसी लीपापोती के पब्लिक किया जाए। CBI जांच की प्रगति बताने के लिए एक लाइव डैशबोर्ड बने जिसे रोज़ अपडेट किया जाए। NTA के ऑफिस में उन अफसरों को लाया जाए जो टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी और बड़े पैमाने पर एग्जाम कराने की समझ रखते हों। फीस रिफंड कर देना काफी नहीं है। जिन लोगों की वजह से 22.79 लाख बच्चों का भविष्य दांव पर लगा, उनकी पहचान कर तेज़ ट्रायल चलाया जाए और संपत्ति ज़ब्त की जाए। जब तक गुनहगारों को सज़ा नहीं मिलेगी, तब तक हर साल NEET का यही हाल रहेगा।
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