*लखनऊ।* तपती दोपहरी में जब सड़कें सूनी पड़ जाती हैं, तब लखनऊ के हुसड़िया चौराहे पर इंसानियत की एक तस्वीर उभरती है। ‘वॉटर मैन’ के नाम से मशहूर अंकुश विजय ने मंगलवार को जरूरतमंदों के बीच खाने के पैकेट बांटकर न सिर्फ पेट की आग बुझाई, बल्कि पानी की एक-एक बूंद बचाने का संदेश भी दिया। इस नेक काम में उनके परिवार और मित्रों ने कंधे से कंधा मिलाकर उनका हौसला बढ़ाया। अंकुश की मुहिम सिर्फ भोजन तक सीमित नहीं है। राजधानी में जगह-जगह प्याऊ लगवाकर वह राहगीरों की प्यास बुझा रहे हैं। जनसेवा को जीवन का मकसद बना चुके अंकुश ने इस मौके पर कहा, “पानी अनमोल है। यह हमारी थाती है, जिसे हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए संभालकर रखना होगा। एक-एक बूंद बचाएंगे, तभी कल बचेगा।” उन्होंने ऐलान किया कि अब उनकी सेवा की यह धारा लखनऊ से निकलकर आसपास के जिलों तक भी पहुंचेगी, ताकि मदद का दायरा और बड़ा हो सके और हर असहाय तक राहत पहुंचे। स्थानीय लोगों ने वॉटर मैन के जज्बे को सलाम करते हुए कहा कि अंकुश जैसे युवा ही समाज की असली पूंजी हैं।
कोरोना वायरस के आतंक ने गूगल, फेसबुक और एपल जैसी कंपनियों पर गंभीर असर डाला है। जहां गूगल ने चीन में स्थित अपने दफ्तर को अस्थाई तौर पर बंद कर दिया है वहीं फेसबुक और एपल ने अपने कामकाज वहां बेहद सीमित कर लिए हैं। गूगल ने अपने कर्मचारियों से कहा है कि जबतक बेहद जरूरी न हो वे घर से बाहर न निकलें। गूगल के इस ऑफिस के बंद होने का असर हांगकांग और ताइवान पर भी पड़ रहा है और गूगल ने इन दोनों देशों के अपने कर्मचारियों से भी कहा है कि वो चीन न जाएं।
नए साल की छुट्टियां को 31 जनवरी से तीन फरवरी तक बढ़ाए जाने के निर्देश के बाद और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी लगी रोक का असर साफ नजर आ रहा है। कोरोना वायरस की वजह से अस्त व्यस्त हुए जीवन और कामकाज को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि कई कंपनियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इस साल शुरु होने वाले एपल के तमाम नए उत्पादों के आने में काफी देरी हो सकती है।
गूगल के चीन में चार ऑफिस हैं जबकि ताइवान में पांच। चीन के दफ्तरों में सेल्स, इंजीनियरिंग और विज्ञापन का काम होता है। गूगल ने अपने कर्मचारियों को अगले दो हफ्तों तक अपने घर से ही काम करने का निर्देश दिया है। साथ ही गूगल ने इस वायरस से निपटने के लिए चीन की रेडक्रॉस सोसाइटी को ढाई लाख डॉलर दिए हैं। रेडक्रॉस पहले ही इस वायरस से प्रभावित मरीजों की मदद के लिए पांच लाख डॉलर का फंड जुटा चुकी है।
गौरतलब है कि गूगल पिछले कई सालों से चीन में कामकाज करने की कोशिश में लगी रही थी। 2010 में में उसने वहां अपना ऑपरेशन बंद कर दिया था, लेकिन फिर 2018 से वह चीन में अपना कामकाज शुरू करने में कामयाब हो गई थी।
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