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ऐशबाग में ओ.पी. श्रीवास्तव मेमोरियल स्कूल का वार्षिकोत्सव संपन्न, बच्चों ने दी रंगारंग प्रस्तुति

    ऐशबाग रामलीला मैदान के तुलसी सभागार मे श्री ओ. पी. श्रीवास्तव मेमोरियल स्कूल जो गरीब और मलीन बस्ती के बच्चो के लिए निशुल्क चलाया जाता है के वाषिर्कोत्सव का आयोजन वसुंधरा एन इनिशिएटिव के द्वारा किया गया।  बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रदर्शन हुआ। स्कूल के संचालक श्री दीनानाथ जी 18 वर्षो से स्कूल शिक्षण का कार्य कर रहे हैं। प्रत्येक वर्ष इन बच्चों का मनोबल बढाने के लिए यह आयोजन किया जाता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री संजीत सिंह SrDEE (NR Railway)एवं श्रीअतुल कृष्ण सिंह( dipty secratary LDA)कर्नल मृदुल कुमार सिंह सेना मंडल रहे। मुख्य अतिथि ने अपने वक्तव्य मे कार्यक्रम को प्रेरणादायक और संदेशप्रद बताया एवं प्रधानाचार्या मीना देवी तथा समस्त शिक्षिकाओं की भूरि-भूरि प्रशंसा की।  कार्यक्रम के आयोजनकर्ता वसुंधरा एन इनिशिएटिव की अध्यक्ष नीना सक्सेना, सरिता शुक्ला, उपाध्यक्ष डा अंजना त्रिपाठी, शंकर रोली, रूचि सिंह लखविन्दर कौर,ज्योति सिंह ऋतुजा सिंह बघेल,विभा तिवारी, वंदना श्रीवास्तव मधुलिका श्रीवास्तव का संपूर्ण सहयोग रहा। वसुंधरा की युवा सृष्टि टीम ने मंच का सं...

एमनियोटिक फ्लूइड के लीकेज से प्रेग्नेंसी में होने वाली समस्या के मरीजो के लिए उम्मीद की नई किरण बना अपॉलोमेडिक्स

 


लखनऊ, 27 अप्रैल 2022, अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटलमें लगभग 24 हफ्ते की गर्भस्थ की जान बचाई  बचाई गई। महिला को इससे पहले भी दो बार मिसकैरिज हो चुका था। इसलिए इस बार प्रेग्नेंसी महिला के लिए बेहद महत्वपूर्ण महत्वपूर्ण । गर्भवती महिला की एम्लिओटिक मैम्ब्रेन लगभग 24 सप्ताह में क्षतिप्रस्त हो गई थी जिसकी वजह से एमनियोटिक  फ्लूइड लीक हो गया था और गर्भस्थ की जान बचाना बेहद गुश्किल था। ऐसे में नॉवल तकनीक के आधार पर अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल की स्त्री एवं प्रसृति रोग एवं फीटल मेडिसिन विशेषज्ञ  डॉ भूमिका बंसल ने एमनियो पैच तकनीक का इस्तेमाल किया। इस तकनीक का प्रयोग प्रदेश के निजी अस्पताल में पहली बार किया गया है। इससे प्रेग्नेंसी को 3 से 4 सप्ताह तक खींचा जा सका। जिसके बाद लगधग 29 सप्ताह पर डिलीवरी हुई और फिर न्योनेटोलॉजी विभाग के डॉ. अनुभव के प्रयास से बच्चे को सकूशल डिस्चार्ज किया गया। 

। डॉ भूमिका बंसल ने बताया कि हॉस्पिटल में साथ गर्भवती महिला लगभग 24 सप्ताह की प्रेग्नेसी के शा आई थी। उसकी एम्निओटिक मैम्ब्रेन क्षतिग्रस्त हो गई थी और सारा फ्लुइृड निकल चुका था। डॉ भूमिका ने बताया कि इस मरीज के पहले भी दो बार मिसकैरिज़ हो चुके थे, इसलिए इस बच्चें को बचाना बेहद जरूरी एमनीओटिक  फ्लूइड एक हल्के पीले रंग का द्रव है जिससे गर्भ में विकसित हो रहे भृण को सुरक्षा मिलती है 


और वो इसी के चलते आसानी से मूवमेंट भी करता है। साथ ही बच्चे के लंग्स का ठीक तरह से विकास हो पाता है एवं एक्सपैंड कर पाते हैं। इसी फ्लूइड के कारण बच्चे के हाथ पैर भी सही से विकशित हो पाते है। किसी वजह से अगर फ्ल्यूड मैम्ब्रेन फट जाए तो एप। एमनियोटिक फ्ल्यूड की कमी के कारण नवजात के फेफड़े विकसित नहीं हो पाते हैं और उसके हाथ, पैर व मुंह में सिकुड़न उत्पन्न हो जाती है। इस स्थिति में अगर प्रेग्नेंसी को कुछ समय के लिए बढ़ाया भी जाए तब भी नवजात के लंग्स पर प्रेशर बढ़ने के कारण उसे जीवन भर के लिए लंग्स की बीमारियां हो सकती हैं। इस केस में सबसे बड़ी चुनौती थी कि कैसे प्रेग्नेंसी का समय बढाया जाए और भ्रूण के सम्पूर्ण व सुरक्षित विकास के लिए फ्लूइड को कैसे रिस्टोर किया जाए।

डॉ भूमिका ने बताया कि ऐसे केस में नवजात को बचाने के लिए एक नई तकनीक एमिनो पैच एवम एमिनो इनफ्यूजन का इस्तेमाल किया गया। इससे       मैम्ब्रेन में फ्लूहड डाला जाता है, लेकिन  मैम्ब्रेन  क्षतिग्रस्त होने की वजह से उसमें से फ्लूइड नही टिक पाता। हमने एक रिसर्च बेस तकनीक को अपनाया जिसमें प्लेटलेट रिच प्लाज्मा और क्रायोप्रेसिपिटेट डाला गया। फिर ऊपर से फ्लूहड डाल दिए गया, 


मैम्ब्रेन का होल सील हो जाता है और फ्लूइड कुछ दिन के लिए रुक गया। ये केस काफी जटिल था क्योंकि सारा फ्लूइड ड्रेन हो चुका था और 2 से 3 मिलीमीटर की एक छोटी सी पॉकेट थी, जिसमें अल्ट्रासाउंड गाइडेड निडिल  के जरिए पहले हमने प्लेटलेट रिच प्लाज्मा डाला, फिर क्रायोप्रेसिपिटेट डाला फिर फ्ल्‌इड डाला। ऐसा करके प्रेग्नेंसी के समय को कुछ सप्ताह और बढ़ाया गया। जिसके बाद लगभग 29वें सप्ताह में सफल डिलीवरी कराई गई और नवजात को एनआइसीयू में रखा गया। 


वहीं डॉ अनुभव ने बताया कि जो नवजात समय से पहले पैदा होते हैं उन्हें दिककते आती है। हालांकि इस प्रेग्नेंसी को 3 से 4 सप्ताह तक बढ़ाया गया। ऐसे में बच्चे को काम्प्लीकेशन कम हुआ। साथ ही जब नवजात पैदा हुआ तो उसके लंग्स काफी हद तक एक्पैंडेड थे और उसके हाथ, पैर व मुंह में किसी भी प्रकार की कोई सिकुड़न नहीं थी क्योंकि एग्     क फ्ल्यूड बहने के बाद भी बच्चे के आस पास पानी की कमी नहीं रही। जिसके बाद उसे वेंटिलेटर पर केवल एक सप्ताह के लिए रखा गया। साथ ही उसे लंग्स को मजबूत करने की दवाएं दी गईं। डॉ अनुभव ने बताया कि हमारे सेंटर में एक किलो या डेढ किलो वजन से कम के बच्चों को सर्वाइवल रेट 90 प्रतिशत तक का है। इस केस में लगभग 29 हफ्ते की प्रैग्नेंसी थी। ऐसे केस में नवजात का सर्वाइवल रेट 60 से 70 प्रतिशत होता है। इसे वेटिलेटर पर भी तीन से चार दिन रखा गया। 

अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के सीईओ और एमडी डॉ मयंक सोमानी ने बताया कि देशभर में बहुत कम सेंटर हैं जहां पर फीटल मेडिसिन की सुविधा उपलब्ध है। हमारे यहां ऐसी हाई रिक्स प्रेग्नेंसी को सुरक्षित डिलीवर किया जा सकता है। इसके अलावा देश भर में गिने चुने निजी अस्पतालों में 26 से 28 सप्ताह से कम के नवजात को बचाया जा सके। अपोलोमेडेडिक्स हॉस्पिटल हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की देखभाल करने के लिए एक वन स्टॉप सेंटर है और हमारा एनआइअसीयू वर्ल्ड क्लास स्टैंडर्ड का है। यहां पर प्रदेश भर से रेफर किए गए 26 से 28 सप्ताह की प्रेग्नेंसी के केसेज में जरूरत पड़ने पर सफलतापूर्वक डिलवरी कराई जाती है। साथ ही हमारे यहां 28 सप्ताह में बच्चों को डिलीवर करने का सर्वाइवल रेट 90 प्रतिशत के करीब है। 


उन्होंने यह भी बताया कि अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल ग्रुप देश का सबसे बड़ा हेल्थ केयर ग्रुप है जो पिछले कई दशको से देश विदेश के लोगों को उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल लखनऊ में हम एक ही छत के नीचे सभी सुपरस्पेशलिटी सेवाएं प्रदेश व आस पास के लोगों को मुहैया करवा रह हैं। किडनी ट्रांसप्लांट, लिवर ट्रांसप्लांट, ब्रेन स्ट्रोक मैनेजमेंट, कैंसर का सम्पूर्ण इलाज के साथ साथ विश्वस्तरीय आईसीयू एवं 240 इमरजेंसी व ट्रामा आदि की सुविधाएं अब लखनऊ में ही उपलब्ध है जिसके लिए पहले लोगों को दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों की और रुख करना पड़ता था। अपोलोमेडिक्स लखनऊ में हम लिवर ट्रांसप्लांट भी कर रहे हैं।

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