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बलरामपुर: तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की घोर लापरवाही, बड़ी आंत काटी, गर्भ में ही फंसा रहा मृत बच्चा

बलरामपुर। जिले के तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रसूता के पति *पवन कुमार मिश्रा* ने अस्पताल के *डॉ. आलोक सिंह* पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पवन मिश्रा ने बताया कि उनकी पत्नी 6 माह की गर्भवती थी, तबीयत खराब होने पर उसे तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर ने बताया कि गर्भ में बच्चे की मौत हो चुकी है और ऑपरेशन कर बच्चे को बाहर निकालना पड़ेगा। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने लापरवाही बरतते हुए प्रसूता की *बड़ी आंत काट दी* और मृत बच्चे को गर्भ में ही छोड़ दिया, जिससे प्रसूता की हालत और बिगड़ गई। जब पवन कुमार मिश्रा अपनी पत्नी को दूसरे अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में ही मृत बच्चे की डिलीवरी हो गई। बाद में पत्नी को गोंडा और फिर लखनऊ रेफर किया गया। वह अभी जीवित है लेकिन हालत नाजुक बनी हुई है। पवन मिश्रा ने डॉक्टर पर धमकी देने और समझौते का दबाव बनाने का भी आरोप लगाते हुए FIR की मांग की है। पीड़ित के साथ खड़े हुए हनुमान प्रसाद  इस मामले में अब *किसान मजदूर संघर्ष पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान प्रसाद* पीड़ित पति पवन कुमार मिश्रा को...

यूजीसी एक्ट-2026 पर पूरे देश में तांडव क्यों- डा. आर.एस. पटेल


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने ओबीसी समाज को न्याय दिया तो उनके खिलाफ गाली गलौज क्यों डॉ आर एस पटेल अगर मुड़ी भर लोगों के दबाव में यह बिल वापस किया गया तो पूरे देश में सड़क पर उतरकर बहुजन समाज के लोग आंदोलन को होंगे बाध्य डा आर.एस. पटेल


लखनऊ, 29 जनवरी। प्रेस कांफ्रेस को सम्बोधित करते हुये सरदार सेना के संस्थापक और जनहित संकल्प पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. आर. एस. पटेल ने बताया कि 13 जनवरी 2026 को यूजीसी एक्ट-2026 के नए ‌नियम को लेकर 14 पेज का भारत सरकार का राजपत्र जारी होता है। यह राजपत्र जारी होने के उपरांत जब हिन्दू धर्म के कुछ खास लोग इस एक्ट का खुलेआम विरोध करते हैं। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक दलित - पिछड़े समाज को टारगेट किया जा रहा है। यहाँ तक कि शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान को खुलेआम गाली दी जाती है। क्या ये खास मानसिकर्ता का प्रदर्शन नहीं है?


डा. पटेल ने बताया कि यूजीसी एक्ट-2026 में एससी-एसटी के साथ पहली बार ओबीसी भी शामिल कर दिया गया है तो उनके दिमाग में यही से परेशानी शुरू होती है। अब के पूर्व विश्वविद्यालय में एससी एसटी ओबीसी के साथ जाति जुल्म और अत्याचार चरम पर होता रहा जिसकी सुनवाई ठीक से कभी नहीं हुई अंततः इस जातीय अन्याय, अत्याचार को ना झेल पाने के कारण तमाम अभ्यर्थी शोक होकर जान गवा देते थे। यह सिलसिला 2012 से शुरू होता है कुछ दिन बाद ओवीसी वर्ग के शहीद रोहित वेमुला जैसा होना हर विद्यार्थी जातीय जुल्म और अत्याचार का शिकार होता है जिन्हें अपनी जान गंवानी पड़ती है। आज भी वह याद हम सब के अंदर दर्द से भरा हुआ है बात यही नहीं रुकती। पायल तड़वी कि संस्थागत हत्या हम भूले नहीं है।


डा. पटेल ने कहा कि यूजीसी का एक आंकड़ा आप सबके सामने है जिसमे 2019-20 में 173 शिकायत जाति भेदभाव की रही जिसमें न्याय नहीं मिल पाया जो 2023, 24 में बढ़कर 4 साल के अंदर ही 118 परसेंट हो जाती है अर्थात 378 मामले जिन पर अभी तक न्याय नहीं मिल पाया।


तथाकथित बौद्धिक लोगों की आंदोलन सुना भाषण सुना जिनमे यह भी सुना की एससी एसटी तक तो ठीक था लेकिन इस बिल में ओबीसी को क्यों शामिल किया गया, असल में सर दर्द ओबीसी समाज से आखिर क्यों? आखिर कब तक ओबीसी समाज इनके धोखे में रहेगा, कब तक इनकी दुकानदारी ओबीसी समाज से चलता रहेगा, कब तक ओबीसी समाज को ठगा जाएगा, कबतक ओबीसी समाज के अधिकारों पर डाका डाला जाएगा।


डा. पटेल ने आगे बताया कि आखिर यूजीसी बिल 2026 से इतनी परेशानी क्यों है ?


हमारे जानकारी के अनुसार यूजीसी 2026 के इक्विटी कमेटी में एससी, एसटी, ओबीसी दिव्यांग महिला तथा ईडब्ल्यूएस के लोगों को भी शामिल किया गया है तो आखिर इतनी परेशानी सवर्ण समाज को क्यों है? एक सर्वे के आधार पर केंद्रीय विश्वविद्यालय 54 से ज्यादा है जिसमें मेरी जानकारी के अनुसार एससी एसटी ओबीसी के कुल केवल 7 कुलपति है बाकी सब के सब सवर्ण समाज से आते हैं और हमने यह भी जानकारी प्राप्त किया है कि इस एक्ट में यह भी नियम दिया गया है कि किसी भी विश्वविद्यालय में इक्विटी कमेटी का अध्यक्ष विश्वविद्यालय का पदेन कुलपति ही होंगे तो आखिर सवर्ण समाज को इतना डर क्यों है? विरोध के नाम पर पूरे देश में उग्र प्रदर्शन देश के ओबीसी प्रधानमंत्री को गाली गलौज यह राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में आता है इस पर कार्रवाई की मांग करते हैं

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