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ऐशबाग में ओ.पी. श्रीवास्तव मेमोरियल स्कूल का वार्षिकोत्सव संपन्न, बच्चों ने दी रंगारंग प्रस्तुति

    ऐशबाग रामलीला मैदान के तुलसी सभागार मे श्री ओ. पी. श्रीवास्तव मेमोरियल स्कूल जो गरीब और मलीन बस्ती के बच्चो के लिए निशुल्क चलाया जाता है के वाषिर्कोत्सव का आयोजन वसुंधरा एन इनिशिएटिव के द्वारा किया गया।  बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रदर्शन हुआ। स्कूल के संचालक श्री दीनानाथ जी 18 वर्षो से स्कूल शिक्षण का कार्य कर रहे हैं। प्रत्येक वर्ष इन बच्चों का मनोबल बढाने के लिए यह आयोजन किया जाता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री संजीत सिंह SrDEE (NR Railway)एवं श्रीअतुल कृष्ण सिंह( dipty secratary LDA)कर्नल मृदुल कुमार सिंह सेना मंडल रहे। मुख्य अतिथि ने अपने वक्तव्य मे कार्यक्रम को प्रेरणादायक और संदेशप्रद बताया एवं प्रधानाचार्या मीना देवी तथा समस्त शिक्षिकाओं की भूरि-भूरि प्रशंसा की।  कार्यक्रम के आयोजनकर्ता वसुंधरा एन इनिशिएटिव की अध्यक्ष नीना सक्सेना, सरिता शुक्ला, उपाध्यक्ष डा अंजना त्रिपाठी, शंकर रोली, रूचि सिंह लखविन्दर कौर,ज्योति सिंह ऋतुजा सिंह बघेल,विभा तिवारी, वंदना श्रीवास्तव मधुलिका श्रीवास्तव का संपूर्ण सहयोग रहा। वसुंधरा की युवा सृष्टि टीम ने मंच का सं...

जोड़ों के दर्द से मिलेगा यूरिक एसिड को नियंत्रित करेंगे ये 3आरामयोगासन




सुबह सोकर जगने के बाद अक्सर शरीर में सुस्ती सी बनी रहती है। ऐसे में बेड छोड़ने का भी मन नहीं होता है। हालांकि योगा का रोजाना अभ्यास किया जाए तो शरीर की सुस्ती भी भाग जाएगी और मानसिक शांति भी मिलेगी। योग करने से न केवल तन स्वस्थ रहता है बल्कि मन भी प्रसन्न होता है। आज हम आपको तीन ऐसे योगासन के बारे में बताएंगे, जिनके नियमित अभ्यास से आपका शरीर चुस्त-दुरुस्त रहेगा और सुस्ती तुरंत दूर हो जाएगी।





वक्रासन
वक्रासन को बैठकर किया जाता है। इस आसन के दौरान आपका मेरूदंड सीध में होता है। इसे करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों पैरों को सामने फैलाकर बैठ जाएं और मेरूदंड को सीध में रखें। अपने दोनों हाथों को आंखों की सीध में सामने हाथ पंजों को जोड़ें सांस अंदर लेते हुए दायीं तरह जाएं और सांस छोड़ते हुए वापस पूर्व की मुद्रा में आएं। अब यही क्रिया बायीं ओर करनी है। इसे आप 3 से 5 बार करें। इसे करने में जल्दबाजी न दिखाएं।




पवनमुक्तासन
पवनमुक्तासन क्रिया का अभ्यास करना बहुत ही आसान है। सबसे पहले जमीन पर लेट जाएं और ध्यान रखें कि पैर दोनों एक सीध में हो और हाथ बगल में रखें हो। एक गहरी सांस लेकर उसे छोड़ते हुए अपने घुटनों को छाती की ओर ले आएं और जांघों को अपने पेट पर दबाएं। अपने हाथों को पैरों के चारों ओर इस तरह से जकड़ें जैसे कि आप अपने घुटनों को टिका रहे हों।




सुप्त मत्स्येंद्रासन
नाम के विपरीत यह आसन करना बेहद आसान है। इसे करने के लिए सबसे पहले जमीन पर लेट जाएं। दोनों हाथों को 180 डिग्री के कोण पर या कंधों की सीध में रखें। अब दायें पैर को घुटनों से मोड़ें और ऊपर उठाएं और बांये घुटने पर टिकाएं। अब सांस छोड़ते हुए दायें कुल्हे को उठाते हुए पीठ को बाईं ओर मोड़े और दायें घुटने को जमीन पर नीचे की ओर ले जाएं। इस दौरान आपके दोनों हाथ अपनी जगह पर ही रहने चाहिए। आपका सिर बायीं ओर रहेगा। यही क्रिया आपको बाएं पैर के साथ करनी है। इस क्रिया को आप 3 से 5 बार कर सकते हैं। इससे आपकी पीठ, नितंब, रीढ़ और कमर की हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होंगी।









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