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बलरामपुर: तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की घोर लापरवाही, बड़ी आंत काटी, गर्भ में ही फंसा रहा मृत बच्चा

बलरामपुर। जिले के तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रसूता के पति *पवन कुमार मिश्रा* ने अस्पताल के *डॉ. आलोक सिंह* पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पवन मिश्रा ने बताया कि उनकी पत्नी 6 माह की गर्भवती थी, तबीयत खराब होने पर उसे तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर ने बताया कि गर्भ में बच्चे की मौत हो चुकी है और ऑपरेशन कर बच्चे को बाहर निकालना पड़ेगा। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने लापरवाही बरतते हुए प्रसूता की *बड़ी आंत काट दी* और मृत बच्चे को गर्भ में ही छोड़ दिया, जिससे प्रसूता की हालत और बिगड़ गई। जब पवन कुमार मिश्रा अपनी पत्नी को दूसरे अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में ही मृत बच्चे की डिलीवरी हो गई। बाद में पत्नी को गोंडा और फिर लखनऊ रेफर किया गया। वह अभी जीवित है लेकिन हालत नाजुक बनी हुई है। पवन मिश्रा ने डॉक्टर पर धमकी देने और समझौते का दबाव बनाने का भी आरोप लगाते हुए FIR की मांग की है। पीड़ित के साथ खड़े हुए हनुमान प्रसाद  इस मामले में अब *किसान मजदूर संघर्ष पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान प्रसाद* पीड़ित पति पवन कुमार मिश्रा को...

वैज्ञानिकों को जल्द का कोरोना वायरस टीका बनाने की उम्मीद




वैश्विक महामारी घोषित हो चुके कोरोना वायरस के कारण अब तक दुनिया में 18605 लोगों की मौत हो चुकी है। भारत की बात करें तो इस बीमारी ने 11 लोगों की जान ले ली है। वहीं इस वायरस के जेनेटिक कोड पर शोध करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अपना रूप नहीं बदल रहा है। जो शोधकर्ताओं के लिए अच्छी खबर है क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि इससे वह लंबे समय तक चलने वाला टीका बना सकते हैं।
 

सभी वायरस समय के साथ विकसित होते हैं। वे एक होस्ट सेल के अंदर रहकर खुद को बढ़ाते हैं और फिर जनसंख्या के जरिए आस-पास फैलते जाते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान कुछ अपने प्राकृतिक रूप में ही रहते हैं जबकि कुछ अपना स्वरूप बदल लेते हैं। हालांकि कोरोना वायरस अपना रूप नहीं बदल रहा है, जिसके कारण त्रुटि दर कम हो जाती है। यह हर जगह एक जैसा ही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि एक वायरस दूसरे से ज्यादा खतरनाक है। 




सार्स-कोव-2 वायरस के कारण कोविड-19 बीमारी होती है। यह कोरोना वायरस के जैसा है जो प्राकृतिक रूप से चमगादड़ों में पाया जाता है। यह पिछले साल चीन के वुहान में मनुष्यों के अंदर आया था। माना जा रहा है कि यह वायरस मध्यवर्ती प्रजाति- संभवत: पेंगोलिन के जरिए फैला है, जिसकी तस्करी पारंपरिक दवा बनाने के लिए की जाती है।




वैज्ञानिक अब वायरस के 1,000 विभिन्न नमूनों का अध्ययन कर रहे हैं। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी में मॉल्यूकल जेनेटिस्ट पीटर थीलन वायरस का अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका में संक्रमित लोगों और वुहान में फैलने वाले मूल वायरस के बीच केवल चार से 10 आनुवंशिक अंतर हैं।

थीलन ने कहा, 'बड़ी संख्या में लोगों को अपनी चपेट में लेने के बावजूद इस वायरस में बहुत कम अनुवांशिक अंतर आया है। ऐसे में उम्मीद है कि सार्स-कोव-2 के लिए एक ही टीका बनाया जा सकता है, जबकि फ्लू के लिए हर साल नया टीका बनाना पड़ता है। यह खसरे या चिकनपॉक्स के टीकों की तरह होगा। कुछ ऐसा जो लंबे समय तक रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाएगा।'

 



 

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