Skip to main content

Featured Post

बलरामपुर: तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की घोर लापरवाही, बड़ी आंत काटी, गर्भ में ही फंसा रहा मृत बच्चा

बलरामपुर। जिले के तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रसूता के पति *पवन कुमार मिश्रा* ने अस्पताल के *डॉ. आलोक सिंह* पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पवन मिश्रा ने बताया कि उनकी पत्नी 6 माह की गर्भवती थी, तबीयत खराब होने पर उसे तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर ने बताया कि गर्भ में बच्चे की मौत हो चुकी है और ऑपरेशन कर बच्चे को बाहर निकालना पड़ेगा। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने लापरवाही बरतते हुए प्रसूता की *बड़ी आंत काट दी* और मृत बच्चे को गर्भ में ही छोड़ दिया, जिससे प्रसूता की हालत और बिगड़ गई। जब पवन कुमार मिश्रा अपनी पत्नी को दूसरे अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में ही मृत बच्चे की डिलीवरी हो गई। बाद में पत्नी को गोंडा और फिर लखनऊ रेफर किया गया। वह अभी जीवित है लेकिन हालत नाजुक बनी हुई है। पवन मिश्रा ने डॉक्टर पर धमकी देने और समझौते का दबाव बनाने का भी आरोप लगाते हुए FIR की मांग की है। पीड़ित के साथ खड़े हुए हनुमान प्रसाद  इस मामले में अब *किसान मजदूर संघर्ष पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान प्रसाद* पीड़ित पति पवन कुमार मिश्रा को...

क्या आप तक जूतों के जरिए भी पहुंच सकता है कोरोनावायरस?


 फेसबुक, ट्विटर समेत तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर थाई भाषा (थाइलैंड की मातृभाषा) में एक पोस्ट वायरल हो रही है। इसमें दावा किया गया है कि कोरोना संक्रमितों का इलाज करने इटली गए चाइनीज डॉक्टरों ने पाया कि 'वहां कोरोनावायरस के फैलने का कारण जूते हैं। इटली के लोग घर और बाहर एक ही जूते पहनते हैं, कुछ बेडरूम में भी उसी शूज का इस्तेमाल करते हैं, जो बाहर पहनते हैं। इसी के चलते वहां कोरोनावायरस इतना ज्यादा फैला।' जूतों को लेकर यह बहस काफी दिनों से चल रही है और कई लोगों के मन में इसे लेकर सवाल हैं कि क्या फुटवियर के जरिए भी कोरोनावायरस फैल सकता है? जानिए इस वायरल दावे का सच। 


एक्सपर्ट ने कहा, जूते कोरोनावायरस को लाने में मध्यस्थ हो सकते हैं



  • थाइलैंड के रोग नियंत्रण विभाग के डिप्टी जनरल डायरेक्टर डॉक्टर तानारक पलिपट ने इंटरनेशनल न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया कि जूते कोरोनावायरस को लाने में मध्यस्थ हो सकते हैं, लेकिन यह संक्रमण का प्राथमिक कारण नहीं हैं। 

  • 7 अप्रैल को न्यूज एजेंसी से फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि जूते भी शर्ट, ट्राउजर की तरह हैं जो बाहर से घर में वायरस ला सकते हैं, लेकिन कोरोनावायरस के संक्रमण का यह सीधा कारक नहीं है, क्योंकि कोरोनावायरस एक सांस से संबंधित बीमारी है जो त्वचा के जरिए ट्रांसमिट नहीं हो सकती। 

  • न्यूयॉर्क के लेनॉक्स हिल हॉस्पिटल के इमरजेंसी फिजिशियन डॉक्टर रॉबर्ट ग्लटर ने हेल्थलाइन को बताया कि घर में घुसने से पहले जूतों को बाहर उतारना चाहिए और साफ करना चाहिए। धोते वक्त यह ध्यान रखें कि उन्हें घर या अपार्टमेंट के बाहर ही साफ किया जाए और सूखने दिया जाए। इससे वायरस के संक्रमण का खतरा कम होगा। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि जूतों में वायरस अधिकतम पांच दिनों तक रह सकता है। अधिकतर जूते लेदर, रबर या प्लास्टिक से बने होते हैं तो यह भी वायरस के कैरियर हो सकते हैं। 

  • हफिंगटन पोस्ट ने फैमिली प्रैक्टिशनर जॉरिन नेनोस के हवाले से लिखा कि जूते संक्रमण का संभावित सोर्स हो सकते हैं। खासकर तब जब भारी आबादी वाले क्षेत्रों में जूते पहनकर जाया जाए। जैसे, किराना दुकाना, दूध डेयरी, वर्कप्लेस आदि। नेनोस कहती हैं कि अभी तक की प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सरफेस पर कोरोनावायरस 12 घंटे तक रह सकता है, तो निश्चित तौर पर यह जूतों में आ सकता है। संक्रामक रोग विशेषज्ञ मैरी ई श्मिट कहती हैं कि जूतों पर वायरस पांच दिन और ज्यादा समय तक भी रह सकता है। 

  • विशेषज्ञों के मुताबिक, सही तरीका ये है कि घर आने के बाद जूतों और कपड़ों को निकाले, उन्हें धोएं और फिर तुरंत खुद भी नहा लें। इससे संक्रमण का खतरा कम होता है। डॉक्टर पलिपट कहते हैं कि, साबुन से हाथों को बार-बार धोना फिर हैंड सैनिटाइजर से साफ करना और हाथों को चेहरे पर टच न करना कोरोनावायरस से बचने का सबसे अच्छा तरीका है। 

  • यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन भी सलाह देता है कि जिन सरफेज को हम बार-बार टच करते हैं, उन्हें हर रोज साफ करना चाहिए। इसके लिए हाउसहोल्ड क्लीनर्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। 


क्या सावधानी रखें



  • घर में अंदर जाने से पहले जूते बाहर ही निकालें। 

  • पानी और साबुन से जूतों को अच्छी तरह से साफ करें। 

  • जिन जूतों को मशीन में धोया जा सकता हो, उन्हें वॉशिंग मशीन में साफ करें। 

  • लेदर के जूते जो धोए नहीं जा सकते, उन्हें क्लीनर से अच्छी तरह से साफ कर संक्रमण से मुक्त करें। 

  • घर के अंदर के फुटवियर अंदर ही इस्तेमाल करें और बाहर वाले बाहर इस्तेमाल करें। बाहर के फुटवियर को अंदन न लाएं।

     फेसबुक, ट्विटर समेत तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर थाई भाषा (थाइलैंड की मातृभाषा) में एक पोस्ट वायरल हो रही है। इसमें दावा किया गया है कि कोरोना संक्रमितों का इलाज करने इटली गए चाइनीज डॉक्टरों ने पाया कि 'वहां कोरोनावायरस के फैलने का कारण जूते हैं। इटली के लोग घर और बाहर एक ही जूते पहनते हैं, कुछ बेडरूम में भी उसी शूज का इस्तेमाल करते हैं, जो बाहर पहनते हैं। इसी के चलते वहां कोरोनावायरस इतना ज्यादा फैला।' जूतों को लेकर यह बहस काफी दिनों से चल रही है और कई लोगों के मन में इसे लेकर सवाल हैं कि क्या फुटवियर के जरिए भी कोरोनावायरस फैल सकता है? जानिए इस वायरल दावे का सच। 



     


     


    एक्सपर्ट ने कहा, जूते कोरोनावायरस को लाने में मध्यस्थ हो सकते हैं



    • थाइलैंड के रोग नियंत्रण विभाग के डिप्टी जनरल डायरेक्टर डॉक्टर तानारक पलिपट ने इंटरनेशनल न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया कि जूते कोरोनावायरस को लाने में मध्यस्थ हो सकते हैं, लेकिन यह संक्रमण का प्राथमिक कारण नहीं हैं। 

    • 7 अप्रैल को न्यूज एजेंसी से फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि जूते भी शर्ट, ट्राउजर की तरह हैं जो बाहर से घर में वायरस ला सकते हैं, लेकिन कोरोनावायरस के संक्रमण का यह सीधा कारक नहीं है, क्योंकि कोरोनावायरस एक सांस से संबंधित बीमारी है जो त्वचा के जरिए ट्रांसमिट नहीं हो सकती। 

    • न्यूयॉर्क के लेनॉक्स हिल हॉस्पिटल के इमरजेंसी फिजिशियन डॉक्टर रॉबर्ट ग्लटर ने हेल्थलाइन को बताया कि घर में घुसने से पहले जूतों को बाहर उतारना चाहिए और साफ करना चाहिए। धोते वक्त यह ध्यान रखें कि उन्हें घर या अपार्टमेंट के बाहर ही साफ किया जाए और सूखने दिया जाए। इससे वायरस के संक्रमण का खतरा कम होगा। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि जूतों में वायरस अधिकतम पांच दिनों तक रह सकता है। अधिकतर जूते लेदर, रबर या प्लास्टिक से बने होते हैं तो यह भी वायरस के कैरियर हो सकते हैं। 

    • हफिंगटन पोस्ट ने फैमिली प्रैक्टिशनर जॉरिन नेनोस के हवाले से लिखा कि जूते संक्रमण का संभावित सोर्स हो सकते हैं। खासकर तब जब भारी आबादी वाले क्षेत्रों में जूते पहनकर जाया जाए। जैसे, किराना दुकाना, दूध डेयरी, वर्कप्लेस आदि। नेनोस कहती हैं कि अभी तक की प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सरफेस पर कोरोनावायरस 12 घंटे तक रह सकता है, तो निश्चित तौर पर यह जूतों में आ सकता है। संक्रामक रोग विशेषज्ञ मैरी ई श्मिट कहती हैं कि जूतों पर वायरस पांच दिन और ज्यादा समय तक भी रह सकता है। 

    • विशेषज्ञों के मुताबिक, सही तरीका ये है कि घर आने के बाद जूतों और कपड़ों को निकाले, उन्हें धोएं और फिर तुरंत खुद भी नहा लें। इससे संक्रमण का खतरा कम होता है। डॉक्टर पलिपट कहते हैं कि, साबुन से हाथों को बार-बार धोना फिर हैंड सैनिटाइजर से साफ करना और हाथों को चेहरे पर टच न करना कोरोनावायरस से बचने का सबसे अच्छा तरीका है। 

    • यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन भी सलाह देता है कि जिन सरफेज को हम बार-बार टच करते हैं, उन्हें हर रोज साफ करना चाहिए। इसके लिए हाउसहोल्ड क्लीनर्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। 


    क्या सावधानी रखें



    • घर में अंदर जाने से पहले जूते बाहर ही निकालें। 

    • पानी और साबुन से जूतों को अच्छी तरह से साफ करें। 

    • जिन जूतों को मशीन में धोया जा सकता हो, उन्हें वॉशिंग मशीन में साफ करें। 

    • लेदर के जूते जो धोए नहीं जा सकते, उन्हें क्लीनर से अच्छी तरह से साफ कर संक्रमण से मुक्त करें। 

    • घर के अंदर के फुटवियर अंदर ही इस्तेमाल करें और बाहर वाले बाहर इस्तेमाल करें। बाहर के फुटवियर को अंदन न लाएं




Comments

Popular posts from this blog

सेंट जोसेफ समूह की चार दिवसीय एनुअल स्पोर्टस मीट स्पर्धा-2025 का भव्य शुभांरभ

  लखनऊ. सेंट जोसेफ ग्रुप ऑफ इन्स्टीट्शन्स के चार दिवसीय नीरू मेमोरियल एनुअल स्पोर्ट्स मीट स्पर्धा-2025 का स्थानीय के0डी0 सिंह बाबू स्टेडियम में मार्च-पास्ट पाइप व ब्रास बैंड की मनमोहक धुनों व के साथ भव्य शुभारंभ हुआ। अतिथि के रूप में खेल निदेशक उत्तर प्रदेश डॉ. आर.पी. सिंह, एमएलसी एवं क्रीड़ा भारती उत्तर प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह, एमएलसी पवन सिंह चौहान, एमएलसी अंगद सिंह,संयुक्त शिक्षा निदेशक प्रदीप कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार,पार्षद शिवपाल सांवरिया आदि उपस्थित थे। स्पर्धा का शुभारंभ खेल मशाल के प्रज्वलन तथा चैंपियंस आफ चैंपियन ट्रॉफी के अनावरण के साथ हुआ। सब जूनियर जूनियर और सीनियर वर्गों में आयोजित स्पर्धा के पहले दिन सभी को  पछाड़ते हुए सीतापुर रोड शाखा ने अपना दबदबा बनाए रखा।बैडमिंटन में क्लीन स्वीप करते हुए सब जूनियर,  जूनियर बालक बालिका  के साथ सीनियर सिंगल व मिक्सड डबल्स के गोल्ड पर अपना कब्जा किया। खो -खो जूनियर बालक - बालिका, बास्केट बॉल जूनियर के खिलाड़ियों ने भी गोल्ड पर अपना कब्जा किया। वहीं कबड्डी के सबसे रोमांचक मुकाबले में स...

नारायणा ई-टेक्नो स्कूल, जानकीपुरम्, लखनऊ ने जेईई मेन के मेधावी विद्यार्थियों को किया सम्मानित

  नारायणा ई-टेक्नो स्कूल, जानकीपुरम्, लखनऊ ने जेईई मेन्स (जनवरी 2026) में उत्कृष्ट परसेंटाइल प्राप्त करने वाले अपने मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान में एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर श्यामल शुक्ला (99.34 परसेंटाइल), रुद्राक्ष पटेल (96.43 परसेंटाइल), विश्वास सिंह मोर्य (95.39 परसेंटाइल), हर्षिता सिंह (91.97 परसेंटाइल), पियुष कुमार यादव (90.48 परसेंटाइल), अभिनव पांडेय (89.78 परसेंटाइल), आयुष कुमार (87.04 परसेंटाइल) तथा अनमोल मिश्रा (85.31 परसेंटाइल) को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान डीजीएम श्री आशुतोष ने प्रेरणादायक उद्बोधन देते हुए विद्यार्थियों को निरंतर उत्कृष्टता के लिए प्रयासरत रहने की प्रेरणा ही। प्रधानाचार्या सुश्री एकता सिंह ने सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्वल भविष्य के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया। कॉलेज डीन श्री नितेश सिंह, आरएनडी हेड शिवा कुमार ने विद्यार्थियों की सफलता के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डालते हुए उनकी निरंतर मेहनत और अनुशासित तैयारी की सराहना की। वाइस प्रिंसिपल श्री सनेश कुमार धीमान ने भी विद्यार्...

28-29 अगस्त को लगेगा लखनऊ का प्राचीन गोगा वीर मेला, प्रेस वार्ता में कमेटी ने कहा- ये हमारी आन-बान-शान

  लखनऊ के प्राचीनतम गोगा वीर-गुरु गोरखनाथ मेले में झूले की अनुमति न मिलने पर मेला समिति में रोष, प्रेस वार्ता कर जताया विरोध *लखनऊ।* राजधानी के सबसे प्राचीन मेलों में शुमार *गुरु गोरखनाथ एवं गोगा वीर चौहान (जाहरवीर) मेले* के आयोजन को लेकर आज एक *प्रेस वार्ता* का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता में *मेला कमेटी के अध्यक्ष राज किरण राज एवं समस्त पदाधिकारियों* ने प्रशासन द्वारा मेले में झूले की अनुमति न दिए जाने पर गहरा रोष व्यक्त किया। अध्यक्ष राज किरण राज ने कहा कि, _"अगर मेले में झूले नहीं होंगे तो महिलाओं और बच्चों को आनंद नहीं आएगा। मेला तो बच्चों और महिलाओं के बिना अधूरा है। झूले ही मेले की जान होते हैं।"_ उन्होंने बताया कि यह मेला *लखनऊ के प्राचीनतम मेलों में से एक* है। यह सिर्फ मेला नहीं, बल्कि हमारे समाज की *आन, बान और शान का प्रतीक* है। इस मेले में दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु बाबा गोगा वीर और गुरु गोरखनाथ जी का आशीर्वाद लेने आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा बार-बार इस मेले के आयोजन में *बाधा डालने का प्रयास* किया जा रहा है। जानबूझकर अड़ंगे लगाए जा...