बलरामपुर। जिले के तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रसूता के पति *पवन कुमार मिश्रा* ने अस्पताल के *डॉ. आलोक सिंह* पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पवन मिश्रा ने बताया कि उनकी पत्नी 6 माह की गर्भवती थी, तबीयत खराब होने पर उसे तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर ने बताया कि गर्भ में बच्चे की मौत हो चुकी है और ऑपरेशन कर बच्चे को बाहर निकालना पड़ेगा। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने लापरवाही बरतते हुए प्रसूता की *बड़ी आंत काट दी* और मृत बच्चे को गर्भ में ही छोड़ दिया, जिससे प्रसूता की हालत और बिगड़ गई। जब पवन कुमार मिश्रा अपनी पत्नी को दूसरे अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में ही मृत बच्चे की डिलीवरी हो गई। बाद में पत्नी को गोंडा और फिर लखनऊ रेफर किया गया। वह अभी जीवित है लेकिन हालत नाजुक बनी हुई है। पवन मिश्रा ने डॉक्टर पर धमकी देने और समझौते का दबाव बनाने का भी आरोप लगाते हुए FIR की मांग की है। पीड़ित के साथ खड़े हुए हनुमान प्रसाद इस मामले में अब *किसान मजदूर संघर्ष पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान प्रसाद* पीड़ित पति पवन कुमार मिश्रा को...
लखनऊ, 25 नवम्बर 2021 । उत्तर प्रदेश में कुम्हारों की हत्या और उत्पीड़न को लेकर प्रजापति शोषित समाज संघर्ष समिति (पीएस4) के प्रमुख छेदीलाल प्रजापति ‘निराला’ ने आज उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता की। विधानसभा घेराव को विफल करने के लिए यूपी सरकार और प्रशासन पीएस 4 के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और लखनऊ आने वाले कुंभारों को आज सुबह से अवैध हिरासत में ले रही है। मीरजापुर में रमेश चंद्र प्रजापति उर्फ पप्पू को सुबह से ही कोतवाली में बैठाए हुए है।
पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की योगी सरकार के दौरान कुम्हार समुदाय के लोगों पर लगातार हमले हो रहे हैं। पिछले साढ़े चार सालों के दौरान उत्तर प्रदेश में कुम्हार समुदाय के करीब 60 लोगों की हत्याएं हो चुकी हैं। पिछले दो सालों के दौरान कुम्हार समुदाय के लोगों के साथ हुई 15 घटनाओं में ही 19 लोगों को मौत के घाट उतारा जा चुका है। ये घटनाएं यह बताती हैं की भाजपा की योगी सरकार में जाति आधार पर कुम्हारों की हत्या और उत्पीड़न किया जा रहा है। पीड़ित परिवारों की बार-बार लिखित शिकायतों के बाद भी ना ही संगत धाराओं में एफआईआर दर्ज किया जा रहा है और ना ही आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है। अब तो पुलिस संरक्षण में ही कुम्हारों की हत्या कर दी जा रही है। लखनऊ जिला जेल में रुपेश कुमार प्रजापति की हत्या और गोरखपुर में फर्जी पुलिस मुठभेड़ में विजय प्रजापति की हत्या ऐसे ही उदाहरण हैं। इसलिए उत्तर प्रदेश में कुम्हार समुदाय के लोगों की हुई हत्या और उत्पीड़न की सभी घटनाओं की जांच उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति की अध्यक्षता में या सीबीआई से उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की जरूरत है।
उन्होंने आगे कहा कि एक साल पहले मैनपुरी में कुम्हार समुदाय के एक ही परिवार के पांच लोगों को जिंदा फूंक दिया गया लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत सत्ताधारी और विपक्षी राजनीतिक पार्टियों के मुखियाओं के मुख से संवेदना के एक शब्द नहीं निकले। कुम्हार समुदाय के लोगों द्वारा डेढ़ महीने तक आंदोलन चलाने के बाद सत्ताधारी भाजपा की सरकार ने पीड़ित परिवार को महज पांच लाख रुपये दिए। जबकि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने ब्राह्मण और बनिया समुदाय के एक व्यक्ति की हत्या होने पर उनके परिजनों को 50 लाख रुपये का मुआवजा और समूह ‘क’ की नौकरी दी। हत्या जैसे संगीन मामले में भी भाजपा सरकार जाति आधार पर पीड़ितों की सहायता और न्याय में भेदभाव कर रही है। मैनपुरी मामले ही में आज तक ठाकुर समुदाय के आरोपी के खिलाफ ना ही कोई मुकदमा लिखा गया और ना ही उसकी गिरफ्तारी की गई जबकि पीड़िता ने मरने से पहले कैमरे के सामने खुद उसका नाम लिया था। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के केराकतपुर गांव में प्लंबर कन्हैयालाल प्रजापति की दिन-दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या में शामिल ठाकुर(भूमिहार) जाति का एक आरोपी आज तक गांव में खुला घूम रहा है। जिला प्रशासन ने बंदूक की नोंक पर कन्हैयालाल प्रजापति के शव का अंतिम संस्कार करा दिया। उस समय प्रशासन ने पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये और मृतक की पत्नी को आंगनबाड़ी की नौकरी देने का वादा किया था जिसे उसने आज तक पूरा नहीं किया। गोरखपुर में पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में विजय प्रजापति की हत्या कर दी लेकिन ठाकुर और ब्राह्मण समुदाय के आरोपियों को कुछ नहीं किया।
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