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बलरामपुर: तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की घोर लापरवाही, बड़ी आंत काटी, गर्भ में ही फंसा रहा मृत बच्चा

बलरामपुर। जिले के तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रसूता के पति *पवन कुमार मिश्रा* ने अस्पताल के *डॉ. आलोक सिंह* पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पवन मिश्रा ने बताया कि उनकी पत्नी 6 माह की गर्भवती थी, तबीयत खराब होने पर उसे तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर ने बताया कि गर्भ में बच्चे की मौत हो चुकी है और ऑपरेशन कर बच्चे को बाहर निकालना पड़ेगा। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने लापरवाही बरतते हुए प्रसूता की *बड़ी आंत काट दी* और मृत बच्चे को गर्भ में ही छोड़ दिया, जिससे प्रसूता की हालत और बिगड़ गई। जब पवन कुमार मिश्रा अपनी पत्नी को दूसरे अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में ही मृत बच्चे की डिलीवरी हो गई। बाद में पत्नी को गोंडा और फिर लखनऊ रेफर किया गया। वह अभी जीवित है लेकिन हालत नाजुक बनी हुई है। पवन मिश्रा ने डॉक्टर पर धमकी देने और समझौते का दबाव बनाने का भी आरोप लगाते हुए FIR की मांग की है। पीड़ित के साथ खड़े हुए हनुमान प्रसाद  इस मामले में अब *किसान मजदूर संघर्ष पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान प्रसाद* पीड़ित पति पवन कुमार मिश्रा को...

11 साल ‘टेंपर’ के: NTR की वो फिल्म जिसने बदल दी साउथ सिनेमा में स्टारडम की परिभाषा



ग्यारह साल पहले ‘टेंपर’ ऐसे वक्त पर आई थी जब NTR के करियर को एक बड़े मोड़ की जरूरत थी, और इस फिल्म ने लोगों की नजरों में उनकी इमेज ही बदल दी। फिल्म हिट रही, लेकिन असली बात ये थी कि इसने एनटीआर को एक नए अंदाज़ में पेश किया और साउथ सिनेमा में उनकी पकड़ और मजबूत कर दी। ये सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं थी, बल्कि वो मोमेंट था जब NTR का स्टारडम और बड़ा, और बेखौफ हो गया। पुरी जगन्नाध के निर्देशन में उन्होंने मास एंटरटेनमेंट के साथ इमोशनल इंटेंसिटी भी दिखाई, और साबित किया कि सुपरस्टार होने के साथ एक्टिंग में गहराई भी हो सकती है।


‘दया’ के रोल में NTR एक भ्रष्ट और घमंडी पुलिस ऑफिसर बने, जो पारंपरिक हीरो जैसा बिल्कुल नहीं था। किरदार ग्रे था, गलतियां करता था, और यही बात उसे अलग बनाती थी। NTR का स्वैग, उनकी डायलॉग डिलीवरी और स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी ने फैंस को तुरंत जोड़ लिया। दमदार एक्शन सीन्स हों या एटीट्यूड वाले पंच डायलॉग, उन्होंने हर सीन में अपनी छाप छोड़ी। लेकिन सिर्फ गुस्सा और रौब ही नहीं, उन्होंने किरदार के अंदर चल रहे बदलाव और टकराव को भी दिखाया, जो बताता है कि बतौर एक्टर वो कितना आगे बढ़ चुके थे।


NTR के इस फेज़ को असली ऊंचाई उस दमदार ट्रांसफॉर्मेशन ने दी, जिसे उन्होंने पर्दे पर जिया। एक स्वार्थी और लालची अफसर से लेकर अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनने वाले इंसान तक का सफर उन्होंने जबरदस्त इंटेंसिटी और इमोशन के साथ दिखाया। खासकर फिल्म के दूसरे हिस्से में, कोर्टरूम सीन्स के दौरान, NTR ने मेनस्ट्रीम तेलुगु सिनेमा की सबसे असरदार परफॉर्मेंस में से एक दी। उनके एक्सप्रेशंस, कंट्रोल्ड डायलॉग डिलीवरी और इमोशनल ब्रेकडाउन ने दिखाया कि वो अपनी इमेज से बाहर निकलकर किरदार की कमजोरी भी दिखाने से नहीं डरते।


सालों बाद भी यह परफॉर्मेंस NTR की फिल्मोग्राफी में एक बेंचमार्क मानी जाती है। फैंस आज भी उनके डायलॉग्स, सीन्स और दया के किरदार को सोशल मीडिया पर सेलिब्रेट करते हैं, जिससे साफ है कि यह रोल लोगों के दिलों में कितनी गहराई से बसा। सबसे अहम बात, यहीं से NTR के करियर का नया चैप्टर शुरू हुआ, जहां मजबूत स्क्रिप्ट्स, लेयर्ड स्टोरीटेलिंग और ऐसी परफॉर्मेंस दिखीं जिनमें कमर्शियल अपील के साथ कंटेंट भी था।


ग्यारह साल बाद ‘टेंपर’ को सिर्फ एक ब्लॉकबस्टर के तौर पर नहीं, बल्कि NTR के करियर के टर्निंग पॉइंट के रूप में याद किया जाता है। यही वो दौर था जब उनका स्टारडम और मैच्योर हुआ, उनके चुनाव और बोल्ड हुए, और बतौर परफॉर्मर उनकी पहचान और गहरी हुई। यह फिल्म याद दिलाती है कि असली सुपरस्टारडम सिर्फ बॉक्स ऑफिस नंबर नहीं, बल्कि बदलाव, असर और खुद को बदलने की हिम्मत से बनता है।

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