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यूपी चुनाव 2027 से पहले चिराग पासवान को बड़ा झटका, LJP(R) के दर्जनों कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल

लखनऊ, उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के कई बड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एक साथ कांग्रेस की सदस्यता ले ली। लखनऊ में हुए जॉइनिंग कार्यक्रम में लोकेश कुमार श्रीवास्तव, पीयूष सोमानी और वेद प्रकाश के नेतृत्व में लोजपा (रामविलास) के दर्जनों कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने सभी को पार्टी की सदस्यता दिलाकर स्वागत किया। बताया जा रहा है कि चिराग पासवान ने कुछ महीने पहले ही ऐलान किया था कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इसके बाद से पार्टी लगातार संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को जोड़ने में लगी थी। यूपी में वैसे भी लोजपा का संगठन ज्यादा मजबूत नहीं माना जाता, ऐसे में चुनाव से पहले ही कार्यकर्ताओं का पाला बदलना पार्टी की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रहा है। *दलित वोट बैंक पर सबकी नजर* यूपी की राजनीति में दलित वोट बैंक की भूमिका बेहद अहम है। इसी वोट बैंक को साधने के...

अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में एडवांस्ड एंडोस्कोपिक तकनीक से 'होल-इन-द-हार्ट' सर्जरी की क्रांतिकारी शुरुआत

 



लखनऊ: दिल की बीमारियों के इलाज में लखनऊ के अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल ने एक नई और आधुनिक शुरुआत की है। अब हार्ट सर्जरी के लिए मरीज की छाती पर बड़ा चीरा लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

डॉ. राहुल भूषण और उनकी टीम ने केवल छोटे छिद्रों और हाई-डेफिनिशन कैमरों की मदद से दिल की जन्मजात बीमारियों के कई सफल ऑपरेशन किए हैं। इस नई तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मरीज न सिर्फ तेजी से ठीक हो रहे हैं, बल्कि उन्हें अस्पताल से बहुत जल्दी छुट्टी भी मिल रही है।


इस सर्जिकल प्रक्रिया में दिल में छेद यानी एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट को ठीक करने के लिए एंडोस्कोपिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। यह एक जन्मजात बीमारी है, जिसमें दिल के ऊपरी हिस्सों के बीच एक छेद रह जाता है। अगर इसे नजरअंदाज किया जाए, तो आगे चलकर यह गंभीर परेशानियां खड़ी कर सकता है। उत्तर प्रदेश में पहली बार इस तरह की एंडोस्कोपिक कार्डियक सर्जरी लगातार (बैक-टू-बैक) की गई है। स्थानीय स्तर पर अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी (एमआईसीएस) को काफी तेजी से अपनाया जा रहा है।


दशकों से ओपन-हार्ट सर्जरी ही आम तरीका रहा है, लेकिन इसमें सर्जन को छाती की हड्डी काटनी पड़ती है और सर्जरी का एक बड़ा निशान भी रह जाता है। यह नया तरीका इन पारंपरिक प्रक्रियाओं से बिल्कुल अलग है। हड्डी काटने के बजाय, डॉ. भूषण छाती के अंदर स्पष्ट रूप से देखने के लिए एक छोटे हाई-डेफिनिशन कैमरे का इस्तेमाल करते हैं। इस बेहद साफ विजन की मदद से वे छोटे छेदों के जरिए ही दिल की सर्जरी करते हैं। इस तकनीक से डॉक्टरों को सटीक बारीकी मिलती है और मरीज के शरीर पर पड़ने वाला शारीरिक तनाव काफी कम हो जाता है।


जिन तीन मरीजों की यह सर्जरी हुई, उनके लिए इसके नतीजे लगभग तुरंत और बेहद असरदार रहे। चूंकि छाती की हड्डी सुरक्षित रही, इसलिए दर्द न्यूनतम था और सर्जिकल आघात न के बराबर रहा। मरीज ऑपरेशन के अगले ही दिन घर जाने के लिए तैयार थे। यह तकनीक हड्डी और मांसपेशियों को सुरक्षित रखने में भी मदद करती है और सर्जरी के बाद होने वाली जटिलताओं के खतरे को काफी कम कर देती है।


कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. राहुल भूषण ने कहा, "हम मूल रूप से पुरानी सर्जरी और महंगी रोबोटिक्स के बीच का अंतर खत्म कर रहे हैं।" डॉ. भूषण, जो नेशनल हार्ट सेंटर सिंगापुर से यह विशेषज्ञता लेकर आए हैं, ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी असरदार तो है, लेकिन कई परिवारों के लिए यह बहुत महंगी होती है। उन्होंने कहा, "यह एंडोस्कोपिक तकनीक सर्जनों को रोबोट जैसी ही सटीकता और छोटे चीरे का लाभ देती है, लेकिन इसकी लागत आधे से भी कम है। यह मरीज की सेहत और आर्थिक स्थिति दोनों ही तरह से फायदेमंद है।"  



रोबोटिक कार्डियक सर्जरी के लिए हाई-एंड इंफ्रास्ट्रक्चर और भारी निवेश की जरूरत होती है। इसके उलट, यह एंडोस्कोपिक तरीका उतने ही बेहतर नतीजे देता है और काफी सुलभ भी है। इससे एक बड़ी आबादी के लिए एडवांस्ड कार्डियक केयर संभव हो पाती है।

यह पहल दिखाती है कि इस क्षेत्र के अस्पताल मरीजों की देखभाल को लेकर अब क्या नजरिया अपना रहे हैं। मरीजों की देखभाल में केवल सर्जरी की सफलता ही मायने नहीं रखती, बल्कि यह भी अहम है कि मरीज कितनी जल्दी अपनी सामान्य जिंदगी में लौट पाता है। 


अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के एमडी और सीईओ डॉ. मयंक सोमानी ने कहा, "हमारा उद्देश्य है कि उत्तर प्रदेश के मरीजों को राज्य से बाहर जाए बिना ही विश्व स्तरीय कार्डियक केयर मिल सके। लखनऊ में ही इस तरह की उन्नत, मिनिमली इनवेसिव तकनीकों को सुलभ बनाना इसी विजन का एक हिस्सा है।"


इन प्रक्रियाओं की सफलता उत्तर प्रदेश के हेल्थकेयर इकोसिस्टम में बदलाव का संकेत है। इससे बिना निशान वाली और सटीक कार्डियक सर्जरी को बड़े पैमाने पर अपनाने का रास्ता खुल रहा है।


अपोलोमेडिक्स मिनिमली इनवेसिव और मरीज-केंद्रित देखभाल पर फोकस के साथ अपने एडवांस्ड कार्डियक प्रोग्राम का लगातार विस्तार कर रहा है।

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