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ऐशबाग में ओ.पी. श्रीवास्तव मेमोरियल स्कूल का वार्षिकोत्सव संपन्न, बच्चों ने दी रंगारंग प्रस्तुति

    ऐशबाग रामलीला मैदान के तुलसी सभागार मे श्री ओ. पी. श्रीवास्तव मेमोरियल स्कूल जो गरीब और मलीन बस्ती के बच्चो के लिए निशुल्क चलाया जाता है के वाषिर्कोत्सव का आयोजन वसुंधरा एन इनिशिएटिव के द्वारा किया गया।  बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रदर्शन हुआ। स्कूल के संचालक श्री दीनानाथ जी 18 वर्षो से स्कूल शिक्षण का कार्य कर रहे हैं। प्रत्येक वर्ष इन बच्चों का मनोबल बढाने के लिए यह आयोजन किया जाता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री संजीत सिंह SrDEE (NR Railway)एवं श्रीअतुल कृष्ण सिंह( dipty secratary LDA)कर्नल मृदुल कुमार सिंह सेना मंडल रहे। मुख्य अतिथि ने अपने वक्तव्य मे कार्यक्रम को प्रेरणादायक और संदेशप्रद बताया एवं प्रधानाचार्या मीना देवी तथा समस्त शिक्षिकाओं की भूरि-भूरि प्रशंसा की।  कार्यक्रम के आयोजनकर्ता वसुंधरा एन इनिशिएटिव की अध्यक्ष नीना सक्सेना, सरिता शुक्ला, उपाध्यक्ष डा अंजना त्रिपाठी, शंकर रोली, रूचि सिंह लखविन्दर कौर,ज्योति सिंह ऋतुजा सिंह बघेल,विभा तिवारी, वंदना श्रीवास्तव मधुलिका श्रीवास्तव का संपूर्ण सहयोग रहा। वसुंधरा की युवा सृष्टि टीम ने मंच का सं...

धूम्रपान करने वालों को कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा खतरा


भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), जोधपुर के वैज्ञानिकों के एक अध्ययन के मुताबिक धूम्रपान करने वालों को कोरोना वायरस के संक्रमण से सबसे ज्यादा खतरा है। वैज्ञानिकों की टीम न्यूरोनिवसिव प्रकृति की खोज कर रही है।


 

यह अध्ययन कोरोना वायरस के एसिंप्टोमेटिक केस को लेकर खतरे की घंटी बजा रही है। एसिंप्टोमेटिक को आसान भाषा में समझें तो वह बीमारी जिसमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं। इस अध्ययन में कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति में एनोस्मिया (सूंघने की कमी) और आयुसीया (स्वाद न आने) जैसे लक्षण हैं तो उसे खुद को तुरंत क्वारंटीन कर लेना चाहिए। इसके बाद उसे खुद को किसी डॉक्टर को दिखाना चाहिए। अमेरिकन केमिकल सोसाइटी (एसीएस) की तरफ से प्रकाशित प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय पत्रिका "कोविड-19 महामारी की न्यूरोलॉजिकल अंतर्दृष्टि" नामक अध्ययन के अनुसार, संक्रमित रोगियों की सूंघने और स्वाद का खत्म हो जाना उनके पूरे सेंट्रल नर्वस सिस्टम (सीएनएस) और मस्तिष्क की अंतर्निहित संरचनाओं को कोराना वायरस के संक्रमण से ज्यादा प्रभावित करता है।


 

 

IIT जोधपुर में प्रोफेसर, सूरजजीत घोष के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में बताया गया है कि कोरोना वायरस एक विशिष्ट मानव रिसेप्टर के साथ बातचीत करने के लिए जाना जाता है, जिसे एचएसीई2 (ह्यूमन एंजियोटेंसिन-कन्वर्जिंग एंजाइम -2) के रूप में भी जानते हैं, यह भी वायरस का प्रवेश बिंदु होता है और ज्यादातर मानव अंगों में फेफड़े से लेकर नाक के म्यूकोसा तक की लगभग सभी जगह उपस्थित होता है। मस्तिष्क को इस रिसेप्टर को व्यक्त करने के लिए भी जाना जाता है।

”घोष ने कहा, 'कोरोना वायरस रोगियों की न्यूरोलॉजिकल संक्रमण को अनुबंधित करने की संभावना धूम्रपान जैसे माध्यमिक कारकों की तरफ तेज हो सकती है। एक पायलट अध्ययन के अनुसार, मानव रिसेप्टर और निकोटिनिक रिसेप्टर के बीच कार्यात्मक बातचीत के कारण धूम्रपान कोविड-19 आधारित न्यूरोइंफेक्शन के अनुबंध की संभावना को बढ़ा सकता है।' 


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